बेटे ने छोड़ा हाथ, तो वृद्ध आश्रम ने दिया बुजुर्ग मां को सहारा; पढ़ें फरीदाबाद की धर्मी बाई की दुखभरी कहानी

फरीदाबाद | पिछले डेढ़ महीने से हरियाणा के फरीदाबाद के एक वृद्ध आश्रम (Old Age Home) में 80 साल की धर्मी बाई रह रही हैं. भले ही उनके चेहरे पर संतोष के भाव दिखाई देते हैं, लेकिन उनकी आंखों में अपनों से बिछड़ने का दुख साफ महसूस किया जा सकता है. अपने जीवन के बारे में सवाल पूछने पर उन्होंने कहा कि उन्हें यहाँ कोई दिक्कत नहीं है. उन्हें समय पर खाना- पीना और सभी जरूरत का सामान मिल जाता है. हालांकि, अपनों की कमी उन्हें लगातार महसूस होती रहती है.

Dharmi Bai Faridabad

परिवार में है बेटा और बेटी

धर्मी बाई बताती हैं कि उनके एक बेटा और एक बेटी हैं. बेटी की शादी के बाद वह अपने परिवार में व्यस्त हो गई, लेकिन उनका बेटा गलत संगत में पड़कर अपनी जिंदगी खराब कर बैठा. इसी कारण इस उम्र में उन्हें अपने गुजर- बसर के लिए वृद्ध आश्रम पर निर्भर होना पड़ा. यहाँ भी उन्हें कोई दिक्कत नहीं है.

पाकिस्तान में हुआ जन्म

धर्मी बाई का जन्म पाकिस्तान में हुआ था. वह बताती हैं कि उनके पूर्वज वहीं के थे, लेकिन उन्हें ज्यादा याद नहीं कि उनका परिवार भारत में कहां आकर बसा. बस इतना याद है कि वह काफी सालों से भारत में रह रही हैं. अब उनके पास बीते समय की कुछ यादें ही बची हैं.

नम आँखों से वह कहती हैं कि यदि उनके बेटे ने गलत संगत में पड़कर अपनी जिंदगी खराब नहीं की होती, तो शायद आज वह भी यहां नहीं होतीं. हालांकि, चेहरे पर संतोष के भाव लिए वह कहती हैं कि अब उन्हें यहां शांति से रहने की जगह मिल गई है. उन्हें किसी से कोई शिकायत नहीं है, लेकिन कभी- कभी अपनों की याद आ ही जाती है.

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Nisha Tanwar
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