फरीदाबाद | आमतौर पर आपने कई मंदिर देखे होंगे, लेकिन हरियाणा के फरीदाबाद के सेक्टर 11 में स्थित एक अनूठा मंदिर बाकियों से अलग है. इस मंदिर का नाम श्री बजरंग नवग्रह अनुसंधान केंद्र है. इसका नाम जितना अलग है, इसकी सोच और कार्य प्रणाली भी उतनी ही विशेष है. यहां सिर्फ पूजा- पाठ ही नहीं, बल्कि ग्रहों के प्रभाव और उनके समाधान पर गहराई से शोध किया जाता है.
यह मंदिर उन लोगों के लिए खास है जो मानते हैं कि जब ग्रहों की दशा बिगड़ती है, तो जीवन की दिशा भी बिगड़ जाती है. यह स्थान मानसिक, शारीरिक और आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे श्रद्धालुओं के लिए एक समाधान केंद्र के रूप में काम करता है.
ग्रह दोष से पीड़ित लोगों के लिए खास
यहां आने वाले श्रद्धालु बताते हैं कि कई बार बहुत मेहनत करने के बावजूद और सब कुछ ठीक होने पर भी उनके काम रुक जाते हैं या नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में वे इस मंदिर में आकर नवग्रह दोष की शांति के लिए पूजा कराते हैं. मंदिर के संस्थापक पंडित गोविंद कृष्ण वत्स ने जानकारी दी कि इस स्थान की नींव उनके पिता श्री श्याम सुंदरलाल वत्स ने रखी थी. वे लोगों को वेदों और वैदिक मंत्रों के माध्यम से ग्रहों के दुष्प्रभाव को नियंत्रित करने के उपाय सिखाना चाहते थे. उन्होंने अपना पूरा जीवन वेद, ज्योतिष और पुरातन ग्रंथों के अध्ययन में लगा दिया था.
साढ़ेसाती से मिलती है मुक्ति
अपने अनुभवों के आधार पर पंडित श्याम सुंदरलाल वत्स ने दो किताबें भी लिखीं, जिनमें नवग्रह शांति की विधियों और उपायों का उल्लेख है. आज भी उनकी लिखी ये किताबें श्रद्धालुओं को उनके जीवन की समस्याओं से छुटकारा पाने में मदद कर रही हैं. इस मंदिर में विशेष रूप से शनि दोष और साढ़ेसाती को दूर करने के लिए पूजा- अर्चना की जाती है. साथ ही, शनि के अन्य दुष्प्रभावों को शांत करने के लिए भी विशेष क्रियाएं करवाई जाती हैं. माना जाता है कि यहां की गई पूजा नवग्रह और शनि से जुड़ी बाधाओं को समाप्त कर देती है. दूर- दराज़ से लोग यहां आकर अपनी परेशानियों का समाधान खोजते हैं.
