फतेहाबाद | हरियाणा सरकार की प्रोत्साहन नीति की बदौलत आज सूबे के किसान परम्परागत खेती का मोह त्याग कर बागवानी और ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं. इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं. कम लागत में किसान अधिक मुनाफा कमा रहे हैं. ऐसे ही एक किसान फतेहाबाद जिले के गांव एमपी रोही से महावीर सिंह है, जिन्होंने फल और सब्जियों की खेती कर अपनी अलग पहचान बना ली है. आज वो दूसरे किसानों के लिए एक उदाहरण पेश कर रहे हैं.
बेस्ट किसान का जीता अवार्ड
परम्परागत खेती छोड़कर पिछले 10 सालों से बागवानी खेती कर रहे महावीर सिंह के काम का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि उन्हें एक बार नहीं बल्कि 3 बार बेस्ट किसान का अवार्ड मिल चुका हैं. उनके खेत में उगी सब्जियों व फलों की मांग सिर्फ फतेहाबाद और आसपास के क्षेत्र ही नहीं बल्कि साथ लगते राज्यों तक पहुंच गई है.
कम समय में अधिक मुनाफा
महावीर बताते हैं कि वो 8 एकड़ भूमि पर मिर्च, शिमला मिर्च, गोभी, तरबूज और खरबूजे की खेती कर रहे हैं. सामान्य खेती से जहां सालभर में 50 हजार रूपए प्रति एकड़ तक कमाई होती है तो वहीं बागवानी खेती से यह कमाई 3 लाख रूपए प्रति एकड़ तक पहुंच जाती है. उन्होंने ऑफ सीजन केवल आधा एकड़ में मिर्च लगाकर 2 लाख रुपए कमा लिए हैं, जबकि अभी इतनी ही फसल और तैयार खड़ी है.
सरकार से मिलती है सब्सिडी
उन्होंने बताया कि फलों और सब्ज़ियों की खेती करने पर सरकार और बागवानी विभाग द्वारा सब्सिडी दी जा रही है. सब्जियों के लिए बनने वाली लो-टनल, मल्चिंग, बीज और फेंसिग के लिए प्रति एकड़ 50 से 55 हजार रुपये तक सब्सिडी मिलती है. वहीं, अलग- अलग किस्म की सब्जियों की काश्त के लिए वे भी विभाग से सब्सिडी प्राप्त कर चुके हैं. इसके साथ ही बागवानी खेती से अधिक मुनाफा कैसे कमाए, विभाग के अधिकारी इसकी जानकारी देते रहते हैं.
तरबूज- खरबूजा मिठास में टॉप
किसान महावीर सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने खेत में तरबूज और खरबूजे की जो वैरायटी लगाई है, वो अन्य वैरायटी के मुकाबले मिठास में लाजबाव है. उन्होंने अन्य किसानों से भी आग्रह करते हुए कहा कि किसानों को अपनी आमदनी में इजाफा करना है तो परम्परागत खेती का मोह त्यागना पड़ेगा. बागवानी और ऑर्गेनिक खेती में यदि थोड़ी सी भी मेहनत और देखभाल की जाए तो कम समय में बंपर कमाई की जा सकती हैं.
