फाइनेंस डेस्क | भारतीय पूंजी बाजार नियामक SEBI की तरफ से म्यूचुअल फंड कंपनियों द्वारा निवेशकों के लिए दिए जाने वाले वार्षिक शुल्क को कम कर दिया गया है, जिससे अब म्यूचुअल फंड पहले की तुलना में और भी सस्ते होने वाले हैं. सेबी का यह फैसला फंड हाउस द्वारा लगाए जाने वाले खर्चों की जटिलता को दूर करने और अधिक स्पष्टता लाने में काफी अहम साबित होने वाला है. आज हम आपको इसी के बारे में जानकारी देने वाले हैं.
नियमों में बदलाव
SEBI की तरफ से क्रश मार्केट में म्यूचुअल फंड द्वारा लिया जाने वाला ब्रोकरेज की सीमा को मौजूदा 12 बेसिक प्वाइंट से घटकर 6 बेसिक प्वाइंट कर दिया गया है. जानकारी देते हुए बताया गया कि डेरिवेटिव सेगमेंट के लिए यह सीमा मौजूदा 5 बेसिक प्वाइंट से घटकर दो बेसिक प्वाइंट कर दी गई है. एग्जिट लोड के ऊपर लगने वाले अतिरिक्त 5 बेसिक प्वाइंट के शुल्क को भी अब समाप्त कर दिया गया है. क्लोज एंडेड इक्विटी स्कीम के तहत BER 1.25% से घटकर 1% हो गया है. साथ ही, इंडेक्स फंड्स और ETFs के लिए 1% से 0.9% है.
ऐसे मिलेगा लाभ
लिक्विड स्कीम फंड का फंड्स के लिए 0.9% कर दिया गया है. वर्तमान समय में भारतीय शेयर बाजार की सबसे बड़ी चिंता विदेशी संस्थागत निवेशकों का बड़े पैमाने पर निकासी करना है. सेबी के इस फैसले की वजह से अब म्यूचुअल फंड पहले की तुलना में और भी ज्यादा सस्ता हो गया है, जिससे ज्यादा- से- ज्यादा लोग इसमें इन्वेस्ट कर सके. लंबे समय के लिए फंड बनाने की संभावनाएं पहले से और भी बेहतर होगी, यह सुधार निवेशकों के लिए ज्यादा प्रदर्शित सुनिश्चित करने वाला है.
