गुरुग्राम | हरियाणा सरकार की तरफ से अरावली क्षेत्र में एक महत्वाकांक्षी जंगल सफारी प्रोजेक्ट को मंजूरी प्रदान कर दी गई है. यह प्रोजेक्ट राज्य का इको टूरिज्म की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट होने वाला है इसे वैश्विक मानचित्र पर स्थापित किया जाएगा. इसी संबंध में पर्यावरण, वन एवं वन्य जीव मंत्री राव नरबीर सिंह ने एक जरूरी बैठक की समीक्षा भी की. आज हम आपको इसी के बारे में जानकारी देने वाले हैं.
हरियाणा सरकार का नया प्रोजेक्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से प्रेरित होकर इस प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू किया जाएगा, यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजन करने में भी एक अहम भूमिका निभाने वाली है. इस परियोजना का शुभारंभ खुद नरेंद्र मोदी के हाथों से होने वाला है. इस प्रोजेक्ट को गुरुग्राम और नूह जिलों में लगभग 10000 एकड़ के विशाल क्षेत्र में बनाया जाएगा.
पहले चरण में लगभग ढाई हजार एकड़ में काम शुरू होगा, जिसकी डिजाइनिंग और डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट अगले दो महीना के अंदर तैयार भी कर ली जाएगी, इस प्रकार की खबरें भी सामने आ रही है.
जल्द जारी किया जाएगा ग्लोबल टेंडर
पर्यावरण मंत्री की तरफ से जानकारी देते हुए बताया गया कि इस परियोजना के लिए ग्लोबल टेंडर प्रक्रिया को भी जल्द से जल्द शुरू किया जाएगा. परियोजना पहले पर्यटन विभाग के अंतर्गत थी, परंतु अब इसे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर वन विभाग को सोपा गया है.
गुजरात की वनतारा परियोजना का दौरा भी किया गया है, जिससे कि इस प्रोजेक्ट का कार्य काफी अच्छे से किया जा सके. बैठक में लाइफ साइंस एजुकेशन ट्रस्ट ने एक प्रेजेंटेशन भी दिया. यह एक बड़े निवेश की योजना है, इसके संचालन के लिए पीपीपी मॉडल पर संभावनाएं भी सर्च की जा रही है.
युवाओं को भी मिलेगा लाभ
पर्यावरण मंत्री की तरफ से जानकारी देते हुए बताया गया कि अरावली ग्रीन बोर्ड परियोजना से स्वदेशी प्रजातियों का वन रोपण, मृदा स्वास्थ्य में सुधार, भूजल और जैव विविधता संरक्षण भी सुनिश्चित हो सकेगा. इस प्रोजेक्ट से न केवल पर्यावरण को मजबूती मिलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं को भी वनमित्र योजना की तरह ही हरित रोजगार के अवसर भी मिलने वाले हैं.
जंगल सफारी प्रोजेक्ट के संबंध में जरूरी दिशा- निर्देश भी दिए जा चुके हैं. अब जल्द ही इस प्रोजेक्ट पर कार्य भी शुरू हो जाएगा. यह परियोजना केंद्रीय जेव प्राधिकरण और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के नियमों के अनुसार ही विकसित की जाएगी. इसका लाभ पर्यावरण के साथ-साथ युवाओं को भी मिलने वाला है.
