गुरुग्राम | ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो (Metro) प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने की कवायद शुरू हो चुकी है. इसके तहत, निर्माण कार्य के दौरान ट्रैफिक जाम से बचने के लिए यातायात पुलिस द्वारा योजना बनाई गई है, जहां भी बेरिकेडिंग की जाएगी, वहां चार या पांच पुलिसकर्मियों की तैनाती रहेगी. ट्रैफिक जाम की स्थिति में तुरंत आराम से ट्रैफिक को डायवर्ट किया जाएगा. इसके लिए पूरा होमवर्क कर लिया गया है.
जमीनी स्तर पर काम शुरू
निकाय चुनावों के चलते लगी आचार संहिता हटने के बाद गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (GMRL), गुरुग्राम मेट्रो डिवलेपमेंट ऑथोरिटी (GMDA) और गुरुग्राम पुलिस की संयुक्त बैठक बुलाई गई है, जिसमें 1 मई से जमीनी स्तर पर काम शुरू करने को लेकर विस्तार से चर्चा की जाएगी. बता दें कि ओल्ड गुरुग्राम की ज्यादातर सड़कों पर ट्रैफिक दबाव रहता है. मेट्रो कॉरिडोर भी भीड़भाड़ वाले इलाकों से होकर गुजरेगा, तो ऐसे में निर्माण कार्य के दौरान जगह- जगह पर बेरिकेडिंग करनी पड़ेगी. ऐसे में ट्रैफिक का दबाव और बढ़ जाएगा.
इन इलाकों में ज्यादा दबाव
सबसे ज्यादा ट्रैफिक का दबाव हीरो होंडा चौक से लेकर रेलवे स्टेशन के पास तक है. इस रूट के दायरे में सेक्टर- 34, सेक्टर- 37, बसई और कादीपुर इंडस्ट्रियल एरिया पड़ते हैं. कई घनी आबादी वाले सेक्टर और कॉलोनियां भी इसी दायरे में आती हैं. पीक आवर्स के दौरान यहां भयंकर ट्रैफिक जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है.
इसे ध्यान में रखते हुए जमीनी स्तर पर काम शुरू करने से पहले GMRL ने गुरुग्राम पुलिस से ट्रैफिक प्लान तैयार करने को कहा था. जिन स्थानों पर बैरिकेडिंग की जाएगी, वहां तैनात पुलिसकर्मी ट्रैफिक जाम की स्थिति उत्पन्न होते ही रूट डायवर्ट कर देंगे.
मेट्रो विस्तार पर काम शुरू करने से पहले आम लोगों को भी ट्रैफिक प्लान के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए. इससे लोगों को ज्यादा परेशानी नहीं होगी. लोग उन रूटों का इस्तेमाल नहीं करेंगे, जिन पर ट्रैफिक का दबाव ज्यादा है. इससे ट्रैफिक पुलिस की परेशानी भी कम होगी. काम शुरू करने से पहले ऐसा माहौल बनाया जाना चाहिए कि ट्रैफिक के बारे में सभी जागरूक हो जाएं- गजेंद्र त्यागी, निदेशक, क्लासिक सिविल इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड
