हरियाणा की बेटी अनीता कुंडू ने फतेह की 6119 मीटर ऊंची टेक्निकल माउंटेन लोबुचे

हिसार । हिसार जिले के फरीदपुर गांव की बेटी अनीता कुंडू ने बुधवार सुबह नेपाल की सबसे खतरनाक टेक्निकल माउंटेन लोबूचे को फतह कर लिया. बता दें कि इसकी ऊंचाई 6119 मीटर है . अनीता कुंडू ने रिपोर्टर से बात करते हुए बताया कि बुधवार सुबह देश की आन बान शान तिरंगे को नेपाल की सबसे खतरनाक मानी जाने वाली चोटी पर फहरा दिया गया है. पूरी चढ़ाई के दौरान बार-बार स्नोफॉल होता रहा, बार-बार मौसम में भी परिवर्तन भी होता रहा.

anita kundu

अनीता कुंडू ने नेपाल की चोंटी को किया फतेह 

लेकिन हमने पूरे जज्बे के साथ सभी विपरीत परिस्थितियों का सामना करके सफलता हासिल की. हमारी पूरी टीम सुरक्षित है. अब अनीता बेस कैंप की ओर जाएगी और वहां से माउंट लहोत्से के अभियान पर निकलेगी. इसकी ऊंचाई 8516 मीटर है. जो लगभग माउंट एवरेस्ट के समान ही है. बता दे कि नई सफलता के लिए अनीता को अब करीब 1 महीने लगातार संघर्ष करना होगा. 8000 से ज्यादा ऊंचाई के विश्व में करीब 14 ऊंची चोटिया है. अनीता के सहयोगी रमेश ने बताया कि सेवा समित अभियान के बाद अनीता विश्व के आठ हजार से ज्यादा ऊंचाई की चोटियों को फतेह करेगी. इन 14 चोटियों में से दो ऊंची चोटियों को अनीता पहले ही फतेह कर चुकी है. तीसरी चोटी की चढ़ाई वह लहोत्से में करेगी.

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इन चोटियों को फतेह कर चुकी है अनीता 

बता दे कि अनीता 12 साल से पर्वतारोहण के साहसिक खेल को खेल रही है. अनीता ने माउंट एवरेस्ट तीन बार,अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी विनसन मासिफ, अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो, यूरोप के सबसे ऊंचे शिखर एल्बर्स, दक्षिण अमेरिका के एकोनकागुआ,ऑस्ट्रेलिया की कार्सटेंस पिरामिड शिखर को भी फतह किया है . बता दे कि उत्तरी अमेरिका के देनाली पर भी उन्होंने संघर्ष किया है. माउंट एवरेस्ट के समान ही माउथ मनासलु को भी अनीता ने फतेह किया है. अनीता ने बताया कि वे साहसिक खेल के माध्यम से अपने देश के युवाओं को संदेश देना चाहती है कि असंभव कुछ भी नहीं होता, अगर हम एक बार ठान ले तो हम कुछ भी कर सकते हैं.

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उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस से डरे नहीं, बल्कि सावधानी बरतें. अनीता ने आगे कहा कि हम युवाओं को अपने सपनों के लिए कड़ा संघर्ष करना चाहिए. हो सकता है कि आज परिस्थितियां विपरीत हो,  लेकिन आपकी मेहनत उन्हें एक ना एक दिन अनुकूल बना लेगी. अनीता कहती है कि पर्यावरण से बढ़कर कुछ भी नहीं है,  हमें ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए. जिससे कि ऑक्सीजन की कमी ना हो. हमें केवल सरकार के भरोसे नहीं रहना चाहिए.  खुद भी वातावरण की शुद्धि के लिए काम करना चाहिए.

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