हिसार | बागवानी फसलों में कीटों की वजह से काफी ज्यादा नुकसान झेल रहे किसानों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है. बता दें कि हिसार स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कीट विज्ञान विभाग ने फल मक्खी की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए नाममात्र कीमत पर फ्रूट फ्लाई ट्रैप विकसित किया है जिससे किसानों की समस्या चुटकियों में हल हो जाएगी.
फ्रूट फ्लाई ट्रैप की कीमत
अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि एक ट्रैप की कीमत 130 रुपए रखी गई है. 1 एकड़ फसल में 14 से 16 ट्रैप लगाने को कहा जाता है, जिसे खेत में टहनी या खूंटी पर आसानी से लगाया जा सकता है. यदि किसी को इसके साथ इस्तेमाल होने वाला सेप्टा चाहिए, तो उसकी कीमत 100 रुपए प्रति नग रहेगी. सेप्टा को समय- समय पर बदलकर इस्तेमाल में लाया जा सकता है.
इस तरह करता है काम
कीट विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. सुनीता यादव ने बताया कि बागवानी फसलों में फ्रूट फ्लाई ट्रैप लगाने से फल मक्खी के नर कीट ट्रैप में फंस कर मर जाते हैं और प्रजनन क्रिया कम होने से इस कीट की संख्या घट जाती है. उन्होंने बताया कि सुनहरे रंग की फल मक्खी फल या सब्जियों में छेद करके अंडे देती है. अंडों से कीट निकलते हैं, जो फल और सब्जियों पर आश्रित रहते हैं. फल और सब्जियों को अंदर से खाने पर उनमें बैक्टीरिया पनपने लगता है और वे सड़कर पकने से पहले ही जमीन पर गिर जाते हैं. मार्च महीने से लेकर दिसंबर तक ये अलग- अलग बागवानी फसलों में नुकसान पहुंचाने का काम करती है.
उन्होंने बताया कि फ्रूट फ्लाई ट्रैप के अंदर केमिकल वाला सेप्टा लगाया जाता है, जिसमें मादा मक्खी की गंध आती है और नर मक्खी इस ओर आकर्षित हो जाती है. फिर वो बोतल में प्रवेश करने के बाद केमिकल के टच में आने से वहीं गिर जाती है और दोबारा निकल नहीं पाती. इस फ्रूट फ्लाई ट्रैप में 5 से 6 हजार मक्खियों को ट्रैप किया जा सकता है.
फ्रूट फ्लाई ट्रैप लगाने का तरीका
इस ट्रैप को छाया में लगाना चाहिए क्योंकि ज्यादा गर्मी के चलते सेप्टा में मौजूद केमिकल तेजी से उड़ जाता है. सही तरीके से इस्तेमाल करने पर एक फ्रूट फ्लाई ट्रैप 45 दिनों तक चल जाता है. एक पेड़ पर एक से डेढ़ मीटर की ऊंचाई पर इसे लगाना चाहिए. अगर किसी को ये ट्रैप चाहिए, तो वो HAU में संपर्क करके बेहद सस्ते दाम पर ले सकता है.
