जींद | देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन पटरियों पर दौड़ने को बेताब है. चेन्नई की इंटीग्रल फैक्ट्री में तैयार की गई यह ट्रेन जींद स्टेशन पर पहुंच चुकी है. इस ट्रेन में 2 ड्राइवर पॉवर कार और 8 यात्री बोगियां है. जल्द ही, जींद रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का लोड चेक के लिए फाइनल ट्रायल होगा. उसके बाद, रेलवे रिसर्च डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गेनाइजेशन (RDSO) और ग्रीन H कंपनी के अधिकारी रिपोर्ट तैयार करेंगे.
दुनिया की सबसे शक्तिशाली ट्रेन
इसी रिपोर्ट के आधार पर पीएमओ से मंजूरी मिलने के बाद हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन को हरी झंडी दिखा दी जाएगी. माना जा रहा है कि इस महीने के आखिर तक ट्रेन के संचालन को हरी झंडी दिखा दी जाएगी. 110- 140 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली इस ट्रेन में एक बार में 2,638 यात्री सफर कर सकेंगे. अभी तक दूसरे देशों में 500- 600 हॉर्स पावर की क्षमता वाली हाईड्रोजन ट्रेन संचालित हो रही है, लेकिन भारत में बनी इस स्वदेशी ट्रेन में 1200 हॉर्स पावर की क्षमता वाला इंजन इस्तेमाल किया गया है.
यह रहेगा किराया
जींद जंक्शन से सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर का सफर तय करने वाली यह ट्रेन जींद जंक्शन से रवाना होकर बीच रास्ते जींद सिटी, पांडु पिंडारा, भंभेवा, गोहाना और मोहाना स्टेशन पर ठहराव करते हुए सोनीपत पहुंचेगी. इस ट्रेन में न्यूनतम किराया 5 रूपए से अधिकतम 25 रुपए तक रहेगा. जींद से सोनीपत के बीच के सफर को यह ट्रेन मात्र 1 घंटे में पूरा करेगी. फिलहाल, चल रही DMU ट्रेनें 2 घंटे में सफर पूरा करती है.
पर्यावरण के लिहाज से फायदेमंद
हाइड्रोजन गैस से चलने वाली इस ट्रेन से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा बल्कि आम यात्रियों को भी किफायती, तेज और सुविधाजनक यात्रा का विकल्प मिलेगा. इससे सड़क मार्ग पर ट्रैफिक दबाव कम होगा. नौकरीपेशा लोगों, स्टूडेंट्स और व्यापारियों के लिए यह ट्रेन बेहद उपयोगी साबित हो सकती है. ट्रेन पूरी तरह प्रदूषण मुक्त होगी. इसमें डीजल या अन्य जीवाश्म ईंधन का उपयोग नहीं किया जाएगा जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी.
