चीते की तरह दौड़ता है यह बैल, लाखों रुपए लग चुकी है बोली

जींद । आधुनिक मशीनीकरण के युग ने खेतों में बैलों की कद्र घटा दी है . बैलों की वैल्यू कम होने का सीधा प्रभाव गाय पालने पर भी पड़ा है. लोग गायों से मूंह मोड़ने लगें हैं जिसके चलते जगह-जगह सैकड़ों की संख्या में बेसहारा गोवंश देखने को मिल रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ जींद जिले के गांव कंडेला निवासी युवा किसान दीपक है जिन्हें आज भी बैलों से बेहद लगाव है. उन्हें बैल पालने का बहुत शौक है.

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बता दें कि इस युवा किसान ने हाल ही में 18 महीने का एक बैल 1 लाख 35 हजार रुपए में बेचा है. यें बैल हिसार जिले के कापड़ो गांव के रहने वाले विनोद ने खरीदा है. इस बैल की खासियत है कि रफ्तार के मामले में आसपास के क्षेत्र में इसका कोई सानी नहीं है. पंजाब और हरियाणा में कई जगहों पर हुई बैल दौड़ प्रतियोगिता में यह इनाम जीत चुका है.

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दीपक बताते हैं कि उनकी खुद की देशी गाय का यह बछड़ा है. वह खुराक के रूप में इसे प्रतिदिन देशी घी,चना,बिनौला, गुड़ व प्रतिदिन पाच लीटर दूध पिलाते थे. उसकी खुराक पर रोजाना 500 रुपए का खर्चा था. दीपक ने बताया कि बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वो अपने पिता के साथ खेती के काम में हाथ बंटाने लग गए. हालांकि खेती के कामों में ट्रैक्टर प्रयोग में लाया जाता है लेकिन अच्छे बैल पालने का शौक उन्हें बचपन से ही रहा है. उन्होंने बताया कि मेरे पास एक और बैल है जिसकी कीमत 2 लाख रुपए लग चुकी है लेकिन वो बेचना नहीं चाहते हैं.

20 सेकंड में 800 फीट दौड़

दीपक ने बताया कि उसका बैल 20 सेकंड में 800 फीट यानि 244 मीटर दौड़ पूरी करता है जो काफी तेज रफ्तार है. इसी खूबी के चलते ग्राहक उसे इसकी इतनी कीमत देने को तैयार है.

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दीपक ने बैलो की तुलना भैंसों से करने की बात पर जबाब देते हुए कहा कि भैंस लगभग तीन साल की होने पर बच्चा देती है. उस समय उसकी कीमत 65 हजार से लेकर एक लाख रुपए तक होती है और यदि अच्छी नस्ल की भैंस हों तो एक से डेढ़ लाख रुपए तक बिक जाती है. लेकिन दीपक का बछड़ा महज डेढ़ साल में ही 1 लाख 35 हजार रुपए में बिक गया. उन्होंने कहा कि लोगों को गाय और बैल पालने चाहिए, इनसे भी वो अच्छी आमदनी कर सकते हैं.

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देशी गाय पालें किसान

पशु विज्ञान केंद्र पिंडारा के प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ रमेश ने कहा कि किसानों को देशी गाय पालने पर जोर देना चाहिए. खेती के काम में देशी नस्ल के बछड़े का प्रयोग होता है. उन्होंने कहा कि किसानों को देशी व साहीवाल नस्ल की गायों को रखना चाहिए. इनसे दूध उत्पादन भी अच्छा होगा और इनके चारे का खर्च भी कम है.

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