ज्योतिष | जल्द ही होलिका दहन का पावन पर्व आने वाला है. सनातन धर्म में होली से ठीक 8 दिन पहले का समय काफी महत्वपूर्ण माना जाता है जिसे होलाष्टक के नाम से भी जाना जाता है. इन 8 दिनों में कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किया जाता… आज हम आपको होलाष्टक के बारे में ही जानकारी देने वाले हैं. होली के त्यौहार को बुराई के अंत के प्रतीक में मनाया जाता है.
होलाष्टक कल से शुरू
होली से पहले आने वाले आठ दिनों को शास्त्रों में बेहद संवेदनशील और मांगलिक कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है. आमतौर पर हम इन्हें ओलाष्टक के नाम से जानते हैं. जैसा की नाम से ही स्पष्ट है कि होली और अष्टक यानी की होली से ठीक 8 दिन पहले का वह कालखंड जब प्रकृति और ग्रहों की स्थिति कुछ ऐसी होती है कि शुभ ऊर्जा का संचार काफी धीमा हो जाता है. इस साल 24 फरवरी यानी कि कल से होलाष्टक की शुरुआत हो रही है जो 3 मार्च को होलिका दहन के साथ समाप्त होगी. इन 8 दिनों तक ना तो शहनाइयां बजती है ना ही घर प्रवेश या किसी प्रकार का कोई भी शुभ कार्य किया जाता है.
सभी ग्रह हो जाते हैं उग्र
पौराणिक कथाओं के अनुसार, होली से पहले वाले 8 दिनों में ही असुर राजा हिरणयकश्यप की तरफ से अपने पुत्र और विष्णु भक्त प्रहलाद को भीषण यातनाएं दी गई थी. अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक प्रहलाद को मारने की कई प्रकार के प्रयास किए गए थे, इसी वजह से इन दिनों को काफी कष्टकारी माना जाता है. अंत में होलिका दहन के दिन प्रहलाद बच गए और बुराई का अंत हुआ. कहा जाता है कि होली से पहले आने वाले 8 दिनों में सूर्य- चंद्रमा- मंगल- बुध- शुक्र- शनि और राहु सभी ग्रह काफी उग्र रूप धारण कर लेते हैं जिससे मनुष्य को कोई भी शुभ फल प्राप्त नहीं होता.
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
अगर आप हाल फिलहाल में कोई नया व्यापार शुरू करने की प्लानिंग कर रहे है या फिर कोई नई दुकान ओपन करना चाह रहे है तो आप इस कार्य को कुछ दिनों के लिए टाल दीजिए, नहीं तो आपकी परेशानी बढ़ जाएगी. साथ ही गृह प्रवेश के लिए भी इन दिनों को बिल्कुल भी अच्छा नहीं माना जाता.
ऐसा करने से व्यक्ति की परेशानियां बढ़ जाती है जितना हो सके आपको इन दिनों में भगवान की पूजा अर्चना करनी चाहिए, जरूरतमंद व्यक्तियों को अनाज- कपड़े- पैसों का दान करना चाहिए. भगवान विष्णु और महादेव की उपासना करनी चाहिए. होली के दिन अपने घर की पूरी अच्छी तरह से साफ- सफाई करके गंगाजल छिड़क जिससे नकारात्मक ऊर्जा पूरी तरह से समाप्त हो जाए.
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. Haryana E Khabar इनकी पुष्टि नहीं करता है.
