26 अगस्त को मनाई जाएगी कृष्ण जन्माष्टमी, इस प्रकार करें भगवान श्री कृष्ण को प्रसन्न

ज्योतिष | हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) का पर्व मनाया जाता है. यह पर्व भगवान श्री कृष्ण के जन्मोंत्सव के रूप में मनाया जाता है. कहा जाता है कि रोहिणी नक्षत्र में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को इनका जन्म हुआ था. भगवान श्री कृष्ण के भक्त इस दिन व्रत व इनकी विशेष पूजा अर्चना करते हैं, अबकी बार जन्माष्टमी का पावन पर्व 26 अगस्त को मनाया जाएगा. आज की इस खबर में हम आपको बताएंगे कि आपको जन्माष्टमी का व्रत कैसे रखना है और इसके क्या नियम और विधि है.

Janmasthami

26 अगस्त है जन्माष्टमी

जन्माष्टमी के व्रत में आप फलहार ले सकते हैं, लेकिन आपको इस बात का विशेष ध्यान रखना है कि आपको इस व्रत में अन्न बिल्कुल भी ग्रहण नहीं करना है. अधिकतर लोग इस व्रत को रात 12:00 के बाद ही खोलते हैं, तो कई लोग इस व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद करते हैं. इस दिन सबसे पहले आपको सूर्योदय से पहले उठना है. स्नान करके व्रत का संकल्प लेना है, फिर भगवान श्री कृष्ण की पूजा अर्चना करनी है. पूरे दिन आपको मन ही मन राधा- कृष्ण का नाम जपना है. उसके बाद, रात 12:00 की पूजा से पहले आपको स्नान करके फिर से स्वच्छ वस्त्र धारण कर लेने हैं. रात में विधि- विधान तरीके से कान्हा की पूजा करनी है.

इन बातों का रखें ध्यान

  • जन्माष्टमी के व्रत में आपको ब्रह्मचर्य का पालन करना है.
  • आपको इस व्रत में भूलकर भी अन्न ग्रहण नहीं करना है.
  • जन्माष्टमी का व्रत उसी दिन रात 12:00 के बाद या फिर अगले दिन सूर्य उदय के बाद खोलना चाहिए.
  • अगर आप भी भगवान श्री कृष्ण के भगत है, तो आपको इस दिन मंदिर अवश्य जाना चाहिए.

डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. Haryana E Khabar इनकी पुष्टि नहीं करता है.

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Meenu Rajput
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मेरा नाम मीनू राजपूत है. हरियाणा ई खबर के साथ पिछले 6 साल से कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रही हूँ. मैं यहाँ पर ज्योतिष, फाइनेंस और बिजनेस से जुडी न्यूज़ कवर करती हूँ.