ज्योतिष डेस्क | सावन के पावन महीने में रुद्राभिषेक करने का खास महत्व बताया गया है और खुद शिव पुराण में भी इसका उल्लेख मिलता है. जो भक्त अपने घर में विधिपूर्वक रुद्राभिषेक करवाता है, उसके जीवन में सुख- समृद्धि का आगमन होता है. इस अनुष्ठान को रुद्राभिषेक इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें रुद्र यानी भगवान शिव का जल या अन्य पवित्र सामग्रियों से अभिषेक किया जाता है.

हर स्थान पर पूजा करने का अलग- अलग फल मिलता है, ठीक उसी तरह घर पर रुद्राभिषेक करते समय भी कुछ खास नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है. अगर इन नियमों का सही तरीके से पालन किया जाए तो इसके शुभ परिणाम मिलते हैं.
ध्यान रखें ये बात
घर पर रुद्राभिषेक शुरू करने से पहले पूरे घर की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए, कहीं भी गंदगी नहीं रहनी चाहिए. जिस स्थान पर पूजा होनी है, उसे भी अच्छी तरह साफ करके वहां एक स्वच्छ आसन बिछाना चाहिए. शिवलिंग को उत्तर दिशा में स्थापित करें और खुद पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें, दिशा को लेकर असमंजस हो तो किसी पंडित से सलाह ली जा सकती है. यदि संभव हो तो पति- पत्नी साथ बैठकर शांत चित्त से संकल्प लेकर पूजा शुरू करें. अभिषेक के लिए श्रृंगी का उपयोग जरूरी बताया गया है, जिससे जल की धारा लगातार बनी रहती है.
जल हो या दूध, किसी से भी अभिषेक किया जा सकता है, बस ध्यान रखें कि धारा बीच में टूटनी नहीं चाहिए. साथ ही जिस घर में यह अनुष्ठान हो, वहां तामसिक भोजन वर्जित माना गया है और पूजा करने वाले दंपती को समापन तक व्रत रखना चाहिए.
पूजा विधि
पूजा की विधि के अनुसार, उस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और शिवलिंग या शिव प्रतिमा को जल से स्नान कराएं. इसके पास एक कलश स्थापित करें. दाहिने हाथ में जल लेकर अपना नाम, गोत्र बोलते हुए मन में संकल्प लें और जल को छोड़ दें. इसके बाद, ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हुए अभिषेक शुरू करें. शिवलिंग पर चंदन लगाएं, बेलपत्र चढ़ाएं, साथ ही फूल, अक्षत, काले तिल और शहद जैसी अन्य सामग्रियां भी अर्पित करें. रुद्राभिषेक के मंत्रों का जाप करते हुए अंत में आरती करें और प्रसाद सभी भक्तों में बांटकर खुद भी ग्रहण करें.
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