ज्योतिष | चैत्र नवरात्रि की शुरुआत कई दिनों से हो चुकी है. अब लोगों के बीच अष्टमी और नवमी तिथि को लेकर काफी कंफ्यूजन बना हुआ है, अगर आज आप हमारे इस आर्टिकल में लास्ट तक बने रहते हैं तो आपका यह कंफ्यूजन काफी आसानी से दूर हो जाएगा. कुछ लोग अष्टमी को तो कुछ लोग नवमी को कन्या पूजन करते हैं. आज हम आपको अष्टमी और नवमी दोनों के बारे में ही जानकारी देने वाले है.
कब है अष्टमी या नवमी तिथि?
आचार्य के अनुसार, किस दिन अष्टमी और किस दिन नवमी को कन्या पूजन होगा आज हम आपको इसके बारे में भी जानकारी देंगे. नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11:30 मिनट के आसपास शुरू हो रही है, जो अगले दिन 10:06 मिनट तक रहने वाली है. ऐसे में कुछ स्थानों पर 26 तारीख को ही रामनवमी का पर्व मनाया जाएगा.
कुछ विद्वानों का कहना है कि भगवान राम का जन्म पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ था. यह नक्षत्र 26 मार्च को नहीं है, 27 तारीख को है ऐसे में रामनवमी का पर्व 27 मार्च को मनाया जाना ज्यादा बेहतर रहेगा.
अब दूर होगा सारा कंफ्यूजन
इसी वजह से 27 मार्च के दिन ही रामनवमी ज्यादा बेहतर रहेगी. इस दिन माता सिद्धिदात्री की विधि- विधान से पूजा अर्चना करने का महत्व बताया गया है. साथ ही, मां गौरी के भी दर्शन किए जाते हैं. अबकी बार 26 मार्च यानी कि गुरुवार के दिन अष्टमी तिथि को महागौरी देवी की आराधना की जाएगी. इस दिन मंगला गौरी माता का दर्शन भी किया जाएगा. कुछ लोग अष्टमी तिथि को कन्या पूजन करते हैं, तो वह इस दिन कन्या पूजन कर सकते हैं. वही जो लोग रामनवमी को कन्या पूजन करते हैं, उन्हें 27 मार्च को कन्या पूजन करना होगा.
19 मार्च से हुई थी नवरात्रों की शुरुआत
2 दिन नवमी तिथि होने की वजह से ही लोगों के बीच में कंफ्यूजन की स्थिति बनी हुई है, परंतु अब आपका यह कंफ्यूजन दूर हो गया होगा. 28 मार्च शनिवार के दिन नौ दिनों तक व्रत करने वाले लोग उदयकालिक दशमी तिथि में अपनेव्रत का पारण करेंगे. कुछ लोग रामनवमी के व्रत में ही पारण कर लेंगे, जो अपने- अपने काफी खास रहने वाला है. अबकी बार चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से हुई थी और माता रानी डोली पर विराजमान होकर आई थी. माता रानी के भक्तों के लिए यह 9 दिन किसी भी बड़े त्यौहार से कम नहीं होते. आपको माता के मंदिरों में इन दिनों काफी भीड़ भी दिखाई दे रही होगी.
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. Haryana E Khabar इनकी पुष्टि नहीं करता है.
