विदेश की लाखों की नौकरी छोड़ कैथल के वीरेंद्र ने गांव में रची सफलता की इबारत, पराली प्रबंधन से की लाखों की कमाई

कैथल | अमेरिका ने हाल ही में 104 अप्रवासी भारतीयों को बेड़ियों में जकड़कर भारत भेजा, जिससे एक नई बहस छिड़ गई है. कुछ लोग इसे अमेरिका का सही फैसला मान रहे हैं, जबकि कुछ इसकी कड़ी आलोचना कर रहे हैं. इन सबके बीच एक बात स्पष्ट है कि भारतीय युवाओं में विदेश में नौकरी करने की जबरदस्त लालसा होती है. हालांकि, कुछ ऐसे भी लोग हैं जो विदेश में अच्छी खासी सैलरी मिलने के बावजूद भारत लौटकर अपना व्यवसाय शुरू करने को प्राथमिकता देते हैं.

Parali Tractor

ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है कैथल जिले के फर्शमाजरा गांव के वीरेंद्र यादव की, जिन्होंने 35 लाख रुपये सालाना की ऑस्ट्रेलियन सैलरी छोड़कर अपने गांव में ही पराली प्रबंधन का व्यवसाय शुरू किया. आज वह 150 से अधिक लोगों को रोजगार दे रहे हैं.

ऑस्ट्रेलिया में मिला था बड़ा पैकेज

वीरेंद्र यादव साल 2008 में स्टडी वीजा पर ऑस्ट्रेलिया गए थे. 3 साल बाद वहां एक कंपनी ने उन्हें 70,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 35 लाख रुपये सालाना) का जॉब ऑफर किया, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया. साल 2017 में उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया और 2018 में अपने गांव में ही पराली प्रबंधन का व्यवसाय शुरू किया. अब वह 4 स्ट्रॉ मशीनों के जरिए पराली की गांठें बनाकर लाखों रुपये कमा रहे हैं. उनके इस फैसले ने न सिर्फ उन्हें एक सफल बिजनेसमैन बनाया, बल्कि उनके गांव के कई लोगों को रोजगार भी दिया. उनकी कमाई सालाना करोड़ों रुपये तक पहुंच चुकी है.

पीएम मोदी ने की तारीफ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2020 में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में वीरेंद्र यादव का जिक्र किया और उन्हें किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बताया. इसके बाद पीएम मोदी ने उन्हें सम्मानित भी किया था. वीरेंद्र का कहना है कि जो लोग विदेश में सफलता की तलाश में जाते हैं, वे भारत में भी मेहनत से वही सफलता पा सकते हैं. उन्होंने बताया कि 2017 में जब वह ऑस्ट्रेलिया से लौटे, तो उन्होंने कुछ नया करने की ठानी.

इसी दौरान उन्होंने देखा कि खेतों में जलती पराली से निकलने वाला धुआं पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा था, जिससे उनकी दोनों बेटियां बीमार पड़ गईं. इस घटना से प्रेरित होकर उन्होंने पराली प्रबंधन का व्यवसाय शुरू किया.

अब कर रहे करोड़ों की कमाई

वीरेंद्र यादव ने पराली प्रबंधन संयंत्र लगाने की जानकारी हासिल की और कृषि विभाग से संपर्क कर अनुदान पर मशीनें प्राप्त की. उन्होंने इस बिजनेस में शुरुआत में 30 से 35 लाख रुपये का निवेश किया. आज वह पराली की गांठों को कांगथली गांव के बिजली संयंत्र और यूपी के नोएडा की पेपर मिलों में बेचते हैं. इससे उन्हें हर साल करोड़ों रुपये की कमाई होती है.

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Nisha Tanwar
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