नई दिल्ली | सम्पूर्ण देश और एक बाज़ार की नीति लाकर केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देने का कार्य किया है. अब उन्हें अपनी फसल बेचने में किसी भी बाध्यता का सामना नहीं करना पड़ेगा. चूंकि इस नीति के लागू होने से पहले तक किसानों को अपनी फसल केवल “एग्रीकल्चर प्रोडक्ट मार्केट कमेटी” की मंडियों में ही बेचने की बाध्यता होती थी लेकिन अब एक देश एक बाजार नीति लागू होने के बाद उनकी यह मजबूरी खत्म हो गयी है. अतः अब एक देश एक बाजार की नीति लागू होने के बाद किसान को अपनी फसल के लिए जहां भी ज्यादा अच्छे दाम मिलेंगे वह वहीं अपनी फसल बेच सकता है.
इस नीति को लागू करने के लिए सरकार ने “एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955” में भी संशोधन किया है. साथ ही आलू, प्याज, खाद्य तेल, दलहन जैसी वस्तुओं को आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी से हटाया गया है. जिससे इनके भंडारण व वितरण में छूट मिलने से इनके उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा. प्रदेश में भी इसका लाभ किसानों को मिल सकेगा. जिसकी जानकारी इंद्री के विधायक रामकुमार कश्यप ने दी. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया अध्यादेश किसानों की आय को दोगुनी करने की दिशा में उठाया गया उपयुक्त कदम है, जिससे इस लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी.
विधायक रामकुमार कश्यप ने बताया कि केन्द्र सरकार ने मूल्य आश्वासन हेतु किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सर्विस अध्यादेश-2020 को भी मंजूरी दे दी है जो किसान हित में लिया गया बड़ा फैसला है. अतः किसानों को ऐसी कल्याणकारी योजनाओं के लागू होने से अपनी मेहनत की फसल को मनचाही मंडी में बेचने की आजादी होने से प्रोत्साहन मिलेगा जिससे कृषि उत्पादन सबंधित सेक्टरों में इजाफा होगा. इसलिए जैसे ही यह एक्ट वास्तविक धरातल पर लागू होता है, इसके लाभ किसानों को मिलने शुरू हो जाएंगे.
