Blood Cancer Day 2021: हर महीने 18-20 लोग हो रहे हैं ब्लड कैंसर का शिकार, यह है बड़ी वजह

लाइफस्टाइल डेस्क, Blood Cancer Day 2021 | हरियाणा प्रदेश में हर महा 18 से 20 लोग ब्लड कैंसर का शिकार हो रहे हैं. पीजीआईएमएस में आने वाले कैंसर के मरीजों पर रिसर्च किया गया था. जिसमें पता चला है कि 14 वर्ष के ऊपर के युवकों में कैंसर बहुत तेजी से फैल रहा है. ब्लड कैंसर के कई कारण जिम्मेदार होते हैं. जिसमें फसलों में पेस्टिसाइड का प्रयोग, रेडिएशन किरणें, अनुवांशिक प्रमुख कारण होते हैं.

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पीजीआईएमएस के ब्लड कैंसर विभाग के इंचार्ज डॉ. सुधीर कुमार अत्री ने बताया है कि यहां 50 से 60 केस प्रति महीने आ जाते हैं. इस बीमारी की खास बात यह है कि इसका पता बहुत देर में लगता है. इसी वजह से इस बीमारी में बहुत ही कम लोग बच पाते हैं. ब्लड कैंसर मुख्यतः 6 प्रकार के होते हैं. लेकिन चार प्रकार के ब्लड कैंसर के मरीज ज्यादा पाए जाते हैं. शेष दो प्रकार के कैंसर के मरीज साल में एक या दो ही आते हैं. पीजीआईएमएस में कैंसर का इलाज दो आयु वर्ग में किया जाता है. 14 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों के कैंसर का इलाज डॉ. अलका यादव देखती है. तथा बड़ी आयु वर्ग का इलाज डॉ. सुधीर अत्री देखते हैं.

ब्लड कैंसर के प्रमुख प्रकार

  1. एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (एएलएल)
  2. दीर्घकालिक लिम्फोसाईटिक ल्यूकेमिया (सीएलएल)
  3. तीव्र माईलोजेनस ल्यूकेमिया (एएमएल)
  4. दीर्घकालिक माईलोजेनस ल्यूकेमिया (सीएमएल)
  5. रोएंदार कोशिका वाली ल्यूकेमिया (एचसीएल)
  6. टी-सेल (टी शैल) प्रोलिम्फोसाईटिक ल्यूकेमिया (टी पीएलएल)
  7. मल्टीपल माइलोमा
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ब्लड कैंसर के लक्षण

जिन लोगों को ब्लड कैंसर होती है वह अक्सर थकान और कमजोरी महसूस करते हैं. इसका कारण यह है कि खून में रक्त कोशिकाओं की कमी हो जाती है. रोगी के पेट में भी सूजन आ जाता है जिसकी वजह से त्याग करने में पीड़ा होती है. इसके साथ-साथ भूख भी कम लगती है.

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ब्लड कैंसर हो सकता है किसी भी उम्र में

ब्लड कैंसर होने की कोई निर्धारित आयु वर्ष नहीं है. किसी भी उम्र में हो सकता है. ब्लड कैंसर होने पर कैंसर की सैल्स मनुष्य के शरीर में खून बनने नहीं देती, जिससे खून की कमी हो जाती है. कैंसर शरीर के खून के साथ-साथ बोन मैरो को भी प्रभावित करता है.

इलाज

कीमो थैरेपी व बोन मैरो ट्रांसप्लांट

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पीजीआईएमएस में कैंसर की रिपोर्ट 4 से 7 दिनों में मिल जाती है. ब्लड कैंसर मिलने पर मुख्य इलाज कीमोथेरेपी ही होता है. गंभीर केसों में जब मरीज की हालत तेजी से खराब होने लगती है तो बोन मैरो ट्रांसप्लांट भी किया जाता है. कैंसर के पहली स्टेज पर मरीज के रिकवरी चांस 90 प्रतिशत तथा दूसरी स्टेज पर 60 प्रतिशत ही रहता है.

पीजीआईएमएस के कैंसर विभाग के इंचार्ज डॉ सुधीर कुमार अत्री ने बताया है कि हर महीने कैंसर से पीड़ित 18 से 20 लोग आते हैं. शुरुआत में सभी मरीजों का कीमोथैरेपी से इलाज किया जाता है. लेकिन जब किसी मरीज की तबीयत अचानक से खराब होने लगती है तो उस केस में बोन मैरो ट्रांसप्लांट भी किया जाता है.

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