महेंद्रगढ़ | आधुनिकता के इस दौर में बैंक व तकनीक के इस्तेमाल से रोजाना नए आविष्कार का जन्म हो रहा है. नित नए बदलाव देखने को मिल रहें हैं जो आमजन की सुविधाओं में इजाफा कर रहे हैं. ऐसे ही बदलाव का एक सशक्त उदाहरण महेंद्रगढ़ निवासी शोधार्थी सचिन अग्रवाल द्वारा विकसित पशुधन QR कोड हैं जो भारतीय पशुपालन क्षेत्र में डिजिटल क्रांति की नई शुरुआत कर रहा है.
उनका यह प्रयास केवल तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि सतत ग्रामीण विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है. आर्थिक रूप से सशक्त पशुपालक ही मजबूत गांवों का निर्माण करेंगे और मजबूत गांव मिलकर सशक्त भारत की नींव रखेंगे.
कंपनी को मिला पेटेंट
सचिन अग्रवाल ने बताया कि पशुधन QR कोड जैसी पहल से गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, डेयरी व्यवसाय को गति मिलेगी और देश की बढ़ती दुग्ध मांग को गुणवत्ता के साथ पूरा करने में मदद मिलेगी.
उन्होंने बताया कि पशुधन QR कोड एक ऐसी अत्याधुनिक तकनीक है, जिसे लेकर कंपनी को पेटेंट भी प्राप्त हो चुका है. IIT दिल्ली, IIM लखनऊ और गुरु अंगद देव वेटेरिनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों ने इस नवाचार को सराहा है और सहयोग भी प्रदान किया है.
लोन प्रकिया होगी आसान
भारत में कृषि के साथ- साथ पशुपालन व्यवसाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. एक पशुपालक के लिए उसका पशु केवल जानवर नहीं, बल्कि चलता- फिरता बैंक होता है. इसके बावजूद, पशुओं की पहचान और रिकॉर्ड के अभाव में बीमा और लोन जैसी सुविधाएं अब तक पशुपालकों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई थीं. बैंक पशुओं को संपत्ति के रूप में स्वीकार करने से हिचकते थे और बीमा कंपनियों को फर्जी दावों का डर बना रहता था.
इन्हीं समस्याओं को समझते हुए सचिन अग्रवाल और उनकी टीम ने पशुधन QR कोड विकसित किया है. इसके जरिए पशुओं को डिजिटल और बायोमेट्रिक पहचान दी जाएगी और आने वाले समय में मशीन लर्निंग आधारित मजल डिटेक्शन तकनीक के माध्यम से स्मार्टफोन से ही गाय या भैंस की पहचान संभव हो सकेगी. इसके साथ ही पशु का स्वास्थ्य, टीकाकरण और स्वामित्व से जुड़ा पूरा डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा.
पशुपालन व्यवसाय को मिलेगा बढ़ावा
इस तकनीक का सबसे बड़ा प्रभाव पशु बीमा और पशु लोन के क्षेत्र में देखने को मिलेगा. पशु की पहचान सुनिश्चित होने से बीमा कंपनियों के लिए पारदर्शिता बढ़ेगी और पशुपालकों को क्लेम प्राप्त करना आसान होगा. वहीं, डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर बैंक पशुओं को संपत्ति मानकर लोन देने में सहज होंगे, जिससे डेयरी और पशुपालन व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा.
