हरियाणा के महेंद्रगढ़ में स्वयं प्रकट हुई थी देवी माहेश्वरी, जानिए 1100 साल पुराने मंदिर की पौराणिक मान्यता

महेंद्रगढ़ | हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में अटेली के पास महासर गांव में स्थित महेश्वरी माता का मंदिर लगभग 1100 वर्ष पुराना है. यह मंदिर क्षेत्र के लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है. मान्यता है कि राजस्थान के पाटन तहसील के सत्यमपुर गांव से पंडित विश्वनाथ अपने परिवार सहित यहां आए थे. उनकी पत्नी लक्ष्मी के साथ संतान न होने के कारण उन्होंने मां के प्रति श्रद्धा भाव से पूजा शुरू कर दी थी.

Maheswari Temple

ऐसे हुए माता के दर्शन

कहा जाता है कि विश्वनाथ माता की आराधना के लिए हिमाचल प्रदेश के नगरकोट जाया करते थे. समय के साथ उनकी उम्र लगभग 80 वर्ष हो गई और शरीर भी बीमारियों से कमजोर पड़ गया. एक बार जब वे दर्शन के लिए जा रहे थे, तो रास्ते में महासर गांव के एक पीपल के पेड़ के नीचे उन्होंने विश्राम किया. उस दौरान उन्होंने मां का स्मरण किया और माता ने पिंडी स्वरूप में प्रकट होकर कहा, “अब मेरे भक्त को कहीं जाने की आवश्यकता नहीं है, मैं सदैव, यहां, तुम्हारे लिए उपस्थित रहूंगी”.

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माता के नाम पर पड़ा गाँव का नाम

मान्यता है कि तभी से यह स्थान माहेश्वरी माता के मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हो गया और माता के नाम पर ही गांव का नाम महासर पड़ा. अटेली से लगभग चार किलोमीटर दूर यह मंदिर टेंपो द्वारा पहुंचा जा सकता है. नवरात्रों के दौरान यहां पहुंचने के लिए स्पेशल ट्रेन भी चलाई जाती है. यह ट्रेन कनीना और अटेली स्टेशनों पर रुकती है, जिससे भक्त आसानी से मंदिर पहुंच पाते हैं.

पुजारी पंडित लालचंद शर्मा के अनुसार, सामान्य दिनों में भी श्रद्धालु यहां माता की पूजा करते हैं लेकिन नवरात्रों में मंदिर में भारी भीड़ उमड़ती है. इन दिनों रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. खास बात यह है कि यहां 365 दिन भंडारा चलता है और हर रोज सुबह और शाम माता की आरती होती है.

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Nisha Tanwar
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