मां ने 16 साल के बेटे को दिया जीवनदान, लगा दी खुद की जान की बाजी; पढ़ें स्पेशल रिपोर्ट

महेंद्रगढ़ | कहते हैं कि एक मां अपने बच्चों के लिए कुछ भी कर सकती है. अगर बच्चों पर कोई मुसीबत आती है, तो मां हमेशा आगे खड़ी रहती है, चाहे उसकी अपनी जान पर ही क्यों न बन आए. ऐसा ही एक उदाहरण महेंद्रगढ़ (Mahendragarh) जिले के अटेली विधानसभा के गांव खेड़ी कांटी में देखने को मिला, जहां एक मां ने अपने 16 वर्षीय बेटे को बिना खुद की चिंता किए लिवर डोनेट कर दिया. अब महिला के इस कदम की हर ओर सराहना हो रही है.

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आर्थिक संकट के बावजूद लिया बड़ा फैसला

महिला अनीता शर्मा ने अपनी परवाह किए बिना अपने 16 वर्षीय बेटे लक्ष्य त्रिपाठी को लिवर डोनेट कर नया जीवन दिया. आर्थिक रूप से विषम परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना करते हुए अनीता ने अपने बेटे को लिवर डोनेट कर परिवार की खुशियां बरकरार रखीं. बता दें कि अनीता शर्मा बीए पास हैं और एक कुशल गृहणी भी हैं.

वह अपने परिवार को एक सूत्र में बांधना बखूबी जानती हैं. जब उनके बेटे पर विपदा आई, तो उन्होंने बिना देर किए अपना लिवर डोनेट करने का निर्णय लिया. उनके पति गांव में एक छोटी सी दुकान चलाते हैं, जिससे परिवार का गुजर- बसर होता है.

लीवर की समस्या से जूझ रहा था बेटा

उनका बेटा 11वीं कक्षा में पढ़ता है और उसे बचपन से ही लीवर संबंधी समस्या थी. डॉक्टरों ने बेटे की उम्र 15 से 16 वर्ष होने के बाद लिवर ट्रांसप्लांट करने की सलाह दी थी. परिवार लगातार डोनर की तलाश कर रहा था, लेकिन ट्रांसप्लांट के भारी खर्च को लेकर वे काफी परेशान थे. डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि लिवर ट्रांसप्लांट ऑपरेशन के लिए 22 लाख रुपए और दवा आदि के लिए 10 से 12 लाख रुपए का अतिरिक्त खर्चा आ सकता है.

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मदद की अपील आई काम

यह सुनकर परिवार की चिंता और बढ़ गई. वे लगातार इस बात को लेकर परेशान थे कि इतनी बड़ी रकम का प्रबंध कैसे होगा. आखिरकार, उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, स्वास्थ्य मंत्री आरती राव, भिवानी- महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र के सांसद चौधरी धर्मवीर सिंह, प्रधानमंत्री राहत कोष और सोशल मीडिया के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों से सहयोग की अपील की. देखते ही देखते रुपयों का प्रबंध हो गया, लेकिन उपयुक्त डोनर नहीं मिल पा रहा था.

लक्ष्य की मां अनीता शर्मा ने खुद अपने बेटे को लिवर डोनेट करने की इच्छा जताई. इसे देखकर उनके भाई महिपाल ने खून देने का जिम्मा उठा लिया. फिर क्या था, सारी औपचारिकताएं तुरंत पूरी कर ली गईं और गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में करीब 12 घंटे के ऑपरेशन के बाद मां के लिवर को बेटे में प्रत्यारोपित कर दिया गया. फिलहाल दोनों स्वस्थ बताए जा रहे हैं. डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि हालांकि यह फैसला जोखिम भरा था, लेकिन अनीता शर्मा अपने फैसले पर अडिग रहीं.

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Nisha Tanwar
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