महेंद्रगढ़ | दक्षिण हरियाणा के नारनौल शहर की सड़कों से ट्रैफिक दबाव कम करने की दिशा में एक और नए बाईपास के निर्माण की कवायद शुरू हो गई है. इस बाईपास निर्माण के लिए सर्वेक्षण कार्य शुरू हो चुका है. यह प्रस्तावित बाईपास शहर से सटे गांवों की जमीन से होकर गुजरेगा. यह नया बाईपास मल्टी मॉडल लाजिस्टिक हब को राष्ट्रीय राजमार्ग NH- 11 और NH- 152D से जोड़ेगा. हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर किसानों ने नाराज़गी ज़ाहिर की हैं.
नारनौल को मिलेगी सौगात
नारनौल शहर की बात करें तो यहां 2 बाईपास पहले से ही बने हुए हैं. पहला नई अनाज मंडी से शुरू होकर शहर के दया नगर, कोरियावास मोड़, कुलाजपुर रोड़ और सिघांना रोड़ से होते हुए महेंद्रगढ़ रोड़ को नसीबपुर के पास जोड़ता है. जबकि दूसरा बाईपास गांव कांवी से शुरू होकर NH- 148B को NH- 11 व NH- 152D को जोड़ता है. यह कांवी से मंढाणा, सेका, कादीपुरी, नीरपुर होते हुए लहरोदा गांव तथा वहां से रघुनाथपुरा गांव के दूसरे छोर तक जाता है.
रिंग रोड बनाने की योजना
दूसरे बाईपास को आगे बढ़ाने तथा इसको रिंग रोड बनाने के लिए नए बाईपास निर्माण की योजना बनाई गई है. जिसके तहत सर्वे कार्य भी पूरा हो चुका है. उम्मीद है कि जल्द ही इस बाईपास निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी.
इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य शहर की सड़कों से गुजरने वाले भारी वाहनों को बाहर की ओर मोड़ना है ताकि शहर की सड़कों से ट्रैफिक दबाव कम किया जा सकें. फिलहाल लॉजिस्टिक हब जाने के लिए भारी वाहनों को शहर के भीतर एंट्री करनी पड़ती है जो ट्रैफिक जाम की एक बड़ी वजह बनता है.
यह नया बाईपास न केवल मल्टी लॉजिस्टिक हब को सीधे नेशनल हाईवे से कनेक्टिविटी प्रदान करेगा बल्कि ढोसी पर्यटन स्थल और प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज को भी बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा. इसके अलावा NHAI द्वारा रघुनाथपुरा से मांदी की दिशा में सड़क को लॉजिस्टिक हब से जोड़ने की भी योजना बनाई गई है.
इस वजह से किसानों में नाराजगी
नए बाईपास निर्माण का विरोध कर रहे किसानों ने बताया कि पहले ही रघुनाथपुरा सहित आसपास के गांवों के किसानों की कई एकड़ जमीन हाइवे और अन्य सरकारी प्रोजेक्ट्स के लिए अधिग्रहित हो चुकी है. अब फिर नए बाईपास के लिए जमीन ली जा रही है जो किसानों के लिए बड़ा नुक़सान हैं.
किसानों ने तर्क देते हुए कहा कि पहले ही लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर एक बाईपास बना हुआ है. ऐसे में नए बाईपास की जरूरत समझ से परे है. हमारी सरकार से मांग है कि किसानों की उपजाऊ भूमि को बचाने के लिए किसी वैकल्पिक मार्ग या अन्य समाधान पर विचार किया जाए. प्रशासन सर्वेक्षण कार्य को आगे बढ़ा रहा है और किसानों का विरोध बढ़ता ही जा रहा है.
