नई दिल्ली | सर्दियों में दिल्ली- NCR की हवा खराब होने से पहले ही प्रदूषण के स्रोतों पर कार्रवाई तेज करने की तैयारी शुरू हो गई है. दिल्ली के 39 उपमंडलों और 250 से अधिक वार्डों में निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाएगी. इसके लिए 78 विशेष उपमंडलीय टीमें और 256 वार्ड-स्तरीय टीमें तैनात रहेंगी. वहीं, 48 प्रदूषण हाटस्पाट पर अलग से विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया जाएगा. आगामी सर्दियों की तैयारियों को लेकर बृहस्पतिवार को उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक हुई.
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में सितंबर 2026 से मार्च 2027 तक प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति पर चर्चा की गई. बैठक में दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के अलावा एनसीआर से जुड़े राज्यों के पर्यावरण मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए.
रात में भी प्रदूषण की जांच
सरकार का फोकस इस बार प्रदूषण के स्रोत का पता लगाकर तुरंत कार्रवाई करने पर रहेगा. 39 उपमंडलों में 78 विशेष टीमें बनाई गई हैं. हर टीम में दो सदस्य होंगे और इनका नेतृत्व दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के सहायक या कनिष्ठ पर्यावरण अभियंता स्तर के अधिकारी करेंगे. टीमें दिन के साथ रात में भी निरीक्षण करेंगी. इनके जरिए पराली और जैव ईंधन जलाने, निर्माण एवं तोड़फोड़ से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक प्रदूषण, गैर-अनुमोदित ईंधन के इस्तेमाल और निर्माण-विध्वंस कचरे की अवैध डंपिंग पर नजर रखी जाएगी. डस्ट पोर्टल के तहत निर्माण गतिविधियों की निगरानी और जनरेटर सेट को लेकर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के निर्देशों के पालन की भी जांच होगी.
जमीनी निगरानी
वार्ड स्तर पर 256 टीमें काम करेंगी. इनमें 250 टीमें नगर निगम दिल्ली, चार नई दिल्ली नगरपालिका परिषद और दो दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड की होंगी. स्थानीय शिकायतों के अलावा ग्रीन दिल्ली और 311 ऐप पर मिलने वाली शिकायतों का भी समयबद्ध निपटारा किया जाएगा. प्रदूषण के लिहाज से संवेदनशील 48 गैर- अनुरूप क्षेत्रों में विशेष अभियान चलेगा. जिलाधिकारियों की निगरानी में अनधिकृत और प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई की जाएगी.
मेटल कास्टिंग, पाउडर कोटिंग, बफिंग-पालिशिंग, प्लास्टिक कचरे का पुनर्प्रसंस्करण, स्प्रे पेंटिंग और हीट-ट्रीटमेंट जैसी गतिविधियां जांच के दायरे में रहेंगी. गैर- अनुमोदित ईंधन का इस्तेमाल करने वाली इकाइयों पर भी कार्रवाई होगी.
