नई दिल्ली | स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी एक अच्छी खबर सामने आई है. बता दें कि भारत देश ने अपना पहला स्वदेशी MRI स्कैनर विकसित कर लिया है. दिल्ली AIIMS में अक्टूबर 2025 तक स्वदेशी एमआरआई स्कैनर को क्लीनिकल ट्रायल के लिए इंस्टॉल किया जाएगा. इस पहल का उद्देश्य न केवल MRI स्कैनिंग की लागत और आयातित मशीनों पर निर्भरता को काफी कम करना है, बल्कि आम लोगों तक इसकी पहुंच को भी सुनिश्चित करना है.
MoU पर हस्ताक्षर
मुंबई में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत काम करने वाले एक स्वायत्त अनुसंधान और विकास संगठन, सोसाइटी फॉर एप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च (SAMEER) और प्रमुख अस्पताल के बीच 1.5 टेस्ला एमआरआई स्कैनर की स्थापना के लिए एक MoU पर हस्ताक्षर किए गए हैं.
दिल्ली AIIMS के निदेशक डॉ. एम श्रीनिवासन ने बताया कि भारत में गंभीर और पोस्ट ऑपरेटिव देखभाल, आईसीयू, रोबोटिक्स, एमआरआई में अधिकांश उपकरण आयात किए जाते हैं. उन्होंने कहा कि इस स्वदेशी एमआरआई मशीन का विकास विदेशी आयातित उपकरणों पर निर्भरता को कम करने के लिए आत्मनिर्भर भारत बनने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
इसका उद्देश्य यह भी सुनिश्चित करना है कि यह मानकों को पूरा करे. SAMEER के महानिदेशक पीएच राव ने कहा कि भारत में एमआरआई स्कैनर के मानदंडों की जांच करने और उन्हें मान्य करने के लिए वर्तमान में कोई तंत्र मौजूद नहीं है, क्योंकि वे देश में नहीं बनते हैं.
ट्रायल के लिए मंजूरी का इंतजार
डॉ. एम श्रीनिवासन ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय एमआरआई स्कैनर को मान्य करने के लिए मानदंड तैयार कर रहा है ताकि ट्रायल के दौरान भी मरीजों पर इसका उपयोग करने की मंजूरी दी जा सके. उन्होंने बताया कि क्लीनिकल और ह्यूमन ट्रायल शुरू करने के लिए मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है.
एक बार जब स्कैनर को स्वास्थ्य सुविधाओं में उपयोग के लिए मान्य कर दिया जाता है, तो एमआरआई स्कैन की लागत में लगभग 50% की कमी आने की संभावना है, जिससे व्यापक आबादी के लिए निदान सुलभ हो जाएगा.
