नई दिल्ली | इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी के बारे में तो आप सब जानते ही होंगे. IGNOU की तरफ से आपको घर बैठे विभिन्न प्रकार के कोर्स और डिग्री करने का मौका दिया जाता है. IGNOU से जुड़े हेल्थकेयर की पढ़ाई करने वाले छात्रों के भविष्य पर खतरा बना हुआ है. IGNOU के डिस्टेंस लर्निंग मोड में कुछ कोर्सेज के एडमिशन की प्रक्रिया को चालू रखना छात्रों के भविष्य को लेकर बड़े सवाल खड़े करता है. आइये जानते हैं कि कैसे इग्नू के कुछ कोर्सेज के लिए डिस्टेंस लर्निंग में एडमिशन कराए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं और कैसे ये छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है.
इन स्टूडेंट्स का भविष्य लटका बीच अधर
IGNOU में हेल्थकेयर से संबंधित पोस्टग्रेजुएट कोर्स करने वाले हजारों छात्रों का भविष्य बीच में लटका हुआ है. इंदिरा गाँधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी ने ऐसे हेल्थकेयर से जुड़े कोर्सेज में एडमिशन प्रक्रिया को जारी रखा हुआ है, जो पहले ही डिस्टेंस मोड में बैन हो गए हैं. इग्नू की तरफ से इस साल अपने एमए साइकोलॉजी प्रोग्राम के लिए लगभग 17,000 नए एडमिशन खोले गए हैं.
ये स्टेप तब लिया गया है, जब यूनिवर्सिटी ग्रैंड कमीशन ने साफतौर पर उन क्लासेज में एडमिशन रोकने के निर्देश जारी किए थे, जिनमें कंपल्सरी क्लीनिकल और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग चाहिए होती है.
पहले से एनरोल स्टूडेंट्स को समस्या
यूनिवर्सिटी अपने एडमिशन प्रॉस्पेक्टस में एक डिस्क्लेमर को सेफगार्ड के तौर पर बता रही है, मगर रेगुलेटरी झगड़े से स्टूडेंट्स को प्रोफेशनल रजिस्ट्रेशन और हायर रिसर्च के चांसेज से डिसक्वालिफाई करने का खतरा है, जिससे पहले से एनरोल स्टूडेंट्स को समस्या हो जाएगी और वे एडमिनिस्ट्रेटिव अनसर्टेनिटी की सिचुएशन में रह जाएंगे.
सिर्फ रेगुलर मोड में संचालित हो सकते है कोर्सेज
यूजीसी की गाइडलाइन की बात करें तो ऐसे कोर्सेज, जिन्हें प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और फील्ड वर्क की आवश्यकता है, वे केवल रेगुलर मोड में ही संचालित हों सकते है. IGNOU का डिस्टेंस लर्निंग मोड में इन कोर्सेज के दाखिले की प्रक्रिया को चालू रखना छात्रों के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
