नई दिल्ली | केंद्र की मोदी सरकार ने 4 नए श्रम (ग्रेच्युटी) कानूनों को लागू कर दिया है जो देशभर में चर्चा बटोर रहे हैं. ये नए कानून 29 पुराने श्रम कानूनों की जगह लेंगे. करीब 5 साल पहले ये लेबर कोड बनाए गए थे.
कर्मचारियों को मिलेगा फायदा
नए कानूनों में हर कर्मी को नियुक्ति पत्र देना, न्यूनतम वेतन में कुशल और अकुशल का भेदभाव खत्म करना, सोशल सिक्योरिटी, गिग वर्कर्स का इंश्योरेंस, महिलाओं को नाइट शिफ्ट, कैब और सुरक्षा, ओवरटाइम पर दोगुने वेतन जैसे कई ऐसे सुधार शामिल हैं, जो करोड़ों कर्मचारियों के लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होंगे. इन्हीं सुधारों में से एक नियम ग्रेच्युटी को लेकर भी है.
1 साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी
ग्रेच्युटी के नए नियम खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं. जिसके तहत अब 1 साल तक किसी कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा, जबकि पहले यह समय- सीमा 5 साल थी. अब कोई कर्मचारी, जिसने किसी कंपनी में 1 साल तक लगाकर नौकरी की हैं, तो वह ग्रेच्युटी का हकदार होगा.
ग्रेच्युटी का फॉर्मूला
टोटल ग्रेच्युटी= (अंतिम बेसिक मंथली सैलरी ) x (15/26) x (नौकरी के वर्ष)
उदाहरणस्वरूप यदि आपने नवंबर 2020 में नौकरी ज्वाइन की थी और नवंबर 2025 में रिजाइन दिया. आपकी अंतिम सैलरी 1 लाख रुपए थी, जिसमें बेसिक सैलरी 50 हजार रुपए थी. ऐसे में आपकी ग्रेच्युटी होगी: 50,000 x (15/26) x 5= 1,44,230 रुपये
अब आपके मन में सवाल उठता है कि इस फॉर्मूले में 26 नंबर कहां से आया तो आपको बता दें कि साल के 11 महीने में 30 या 31 दिन होते हैं, जबकि फरवरी में 28 या 29 दिन होते हैं. लेबर कोड के अनुसार, कम से कम 4 साप्ताहिक छुट्टियों को घटाया जाए तो ये 26 होता है. फॉर्मूले में 26 यहीं से आया.
अब मान लीजिए कि किसी ने आज की तारीख में यानि नवंबर 2025 में 70 हजार रुपये बेसिक सैलरी वाली नौकरी ज्वाइन की है और एक साल बाद वो नवंबर 2026 में रिजाइन कर देता है, तो उसे उस समय ग्रेच्युटी मिलेगी: 70,000x (15/26) x 1= 40,385 रुपये.
