नई दिल्ली | देश में लागू नए लेबर कोड संहिताओं के बाद 2026 में ग्रेच्युटी से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव हुआ है, जिसका सीधा असर कर्मचारियों की सैलरी और रिटायरमेंट बेनिफिट पर पड़ेगा. इससे कर्मचारियों को पहले के मुकाबले अधिक ग्रेच्युटी मिलेगी. इस बदलाव का उद्देश्य कर्मचारियों को अधिक सामाजिक सुरक्षा देना है. ये बदलाव 21 नवंबर 2025 से लागू माने जाएंगे.

फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को फायदा
नए नियमों के बावजूद यदि कोई कर्मचारी किसी कंपनी में नियमित रूप से काम करता है, तो उसे ग्रेच्युटी पाने के लिए पहले की तरह कम से कम 5 साल लगातार सेवा करनी होगी. इस नियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यह राशि रिटायरमेंट, इस्तीका, नौकरी छोड़ने, मृत्यु और विकलांगता जैसी स्थितियों में दी जाती है. इसमें गणना का आधार लास्ट सैलरी और कुल सर्विस समय ही रहेगा.
बदलाव फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों के लिए किया गया है. अब ऐसे कर्मचारियों को 5 साल पूरा करने की जरूरत नहीं है. यदि वे कम से कम एक साल की सर्विस पूरी करता है तो उसे उसके कार्यकाल के अनुपात में ग्रेच्युटी दी जाएगी. इससे कॉन्ट्रैक्ट और प्रोजेक्ट आधारित नौकरियों में काम करने वाले कर्मचारियों को बड़ा फायदा होगा.
कर्मचारियों और कंपनियों पर असर
नए नियमों से ग्रेच्युटी की गणना का फार्मूला पहले जैसी ही रखा गया है लेकिन वेतन की नई परिभाषा लागू की गई है, जिसके अनुसार किसी कर्मचारी की कुल सैलरी का कम से कम 50% हिस्सा बेसिक वेतन होना चाहिए. पहले कंपनियां बेसिक सैलरी कम और अलाउंस ज्यादा रखती थी, जिससे ग्रेच्युटी कम बनती थी. अब यदि भत्ते ज्यादा होंगे तो उन्हें बेसिक सैलरी में जोड़ा जाएगा, जिससे ग्रेच्युटी अधिक होगी.
इन नए नियमों से कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने वाला है, क्योंकि उनकी रिटायरमेंट सुरक्षा ओर मजबूत होगी. इससे सैलरी पैमाना अधिक पारदर्शी होगा. कंपनियों के लिए यह बदलाव थोड़ा लागत बढ़ाने वाला हो सकता है क्योंकि उन्हें सैलरी पैमाने को नए नियमों के अनुसार बनाना होगा.