नई दिल्ली | कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों सदस्यों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है. अब इन्हें नियोक्ता द्वारा किसी सत्यापन या ईपीएफओ की मंजूरी के बगैर भी नाम और जन्मतिथि जैसी व्यक्तिगत जानकारियों में ऑनलाइन बदलाव करने की सुविधा मिलेगी. यह सुविधा 18 जनवरी यानि कल शनिवार से शुरू हो चुकी है.
केंद्रीय मंत्री ने दिया तोहफा
EPFO के E- KYC अकाउंट (आधार कार्ड से लिंक) वाले सदस्य, नियोक्ता के हस्तक्षेप के बिना आधार OTP के साथ सीधे अपने ईपीएफ हस्तांतरण दावे ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं. केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने EPFO की इन दोनों नई सेवाओं की शुरुआत करते हुए कहा कि ईपीएफओ सदस्यों द्वारा दर्ज लगभग 27 फीसदी शिकायतें सदस्य प्रोफाइल/ केवाईसी मुद्दों से संबंधित हैं और इस सुविधा के शुरू होने के बाद इन शिकायतों में उल्लेखनीय रूप से गिरावट आएगी.
उन्होंने बताया कि कर्मचारियों के व्यक्तिगत विवरणों में संशोधन के अनुरोधों का लाभ भारी कार्यबल वाले बड़े नियोक्ताओं को भी होगा. हमने ईपीएफओ पोर्टल पर संयुक्त घोषणा की प्रक्रिया को आसान बना दिया है. इससे कर्मचारियों को नाम, जन्म- तिथि, लिंग, राष्ट्रीयता, पिता/ माता का नाम, वैवाहिक स्थिति, पति/ पत्नी का नाम, कामकाजी संगठन से जुड़ने और छोड़ने की तारीख जैसी व्यक्तिगत जानकारियों में होने वाली आम त्रुटियों को खुद ही सुधारने की सुविधा मिल गई है.
2017 से पहले का होना चाहिए UAN
केंद्रीय श्रम मंत्री ने बताया कि यह सुविधा उन सदस्यों के लिए उपलब्ध होगी, जिनका UAN एक अक्टूबर 2017 (जब आधार कार्ड से मिलान अनिवार्य हो गया था) के बाद जारी किया गया था. उन्होंने बताया कि केवल उन मामलों में जहां UAN को आधार कार्ड से नहीं जोड़ा गया है, वहां किसी भी सुधार को नियोक्ता के समक्ष भौतिक रूप से प्रस्तुत करना होगा तथा सत्यापन के बाद अनुमोदन के लिए EPFO को भेजना होगा.
