नई दिल्ली | राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गीले कचरे के वैज्ञानिक निपटान और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन की दिशा में अहम कदम उठाया गया है. बता दें कि नगर निगम (MCD) राजधानी में नए बायोमेथेनशन प्लांट स्थापित करने की तैयारी कर रहा है. इसके माध्यम से गिले कचरे से बायो- सीएनजी का उत्पादन किया जाएगा. इस पहल का उद्देश्य कचरे के बढ़ते बोझ को कम करना, लैंडफिल साइटों पर दबाव घटाना और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना है.
लगभग 51 अरब डॉलर का अवसर
एक अध्ययन के अनुसार यदि भारत के शहरों में जैविक कचरे के प्रबंधन को व्यवस्थित रूप से बढ़ावा दिया जाए तो वर्ष 2047 तक यह क्षेत्र लगभग 51 अरब डॉलर का आर्थिक अवसर पैदा कर सकता है और लाखों रोजगार सृजित कर सकता है. इन बायोमेथेनेशन और कंपोस्टिंग जैसी तकनीकों के सही उपयोग से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है.
CEEW के अध्ययन “आर्गेनिक वेस्ट सर्कुलर इकोनामी फार विकसित भारत” के अनुसार शहरों में गीले कचरे की प्रोसेसिंग बढ़ाकर नेट उत्सर्जन में लगभग 68 मिलियन टन कार्बन डाइआक्साइड के बराबर कमी लाई जा सकती है. बता दें कि वर्तमान में शहरों में रोजाना डेढ़ लाख टन ठोस कचरा निकलता है, जिसमें आधा हिस्सा जैविक कचरे का होता है.
कचरा प्रबंधन में तेजी से कार्य
राजधानी में कचरा प्रबंधन की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है. पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि जैविक कचरे से तैयार होने वाली प्रति किलो बायो – सीएनजी, आयातित जीवाश्म ईंधन की निर्भरता को कम किया जा सकता है. दिल्ली के प्रमुख डेयरी क्लस्टरों में नंगली, गोयला, घोगा और भलस्वा में बायोमेथेनेशन प्लांट चालू किए गए है.
इसके लिए MCD राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड के साथ मिलकर कार्य कर रही है, ताकि बायो-सीएनजी को सीधा राजधानी के गैस वितरण नेटवर्क से जोड़ा जा सके. यह प्रयास भविष्य के लिए एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है.
