हरियाणा: ‘विभीषणों’ ने बढ़ाई प्रमुख पार्टियों की टेंशन, हो सकता है बड़ा उलटफेर; यहाँ समझिये पूरा गणित

नूंह | हरियाणा विधानसभा चुनावों के चलते सभी पार्टियों जोर- शोर से जुटी हुई हैं. कोई भी पार्टी अपनी तरफ से कोई कोर- कसर नहीं छोड़ना चाहती. बात करें अगर नूंह की तो यहां की तीनों विधानसभा सीटों पर प्रमुख दलों के प्रत्याशियों के लिए परेशानियां चल रही हैं, क्योंकि इन्हें भीतरघातियों का डर सत्ता रहा है. हालांकि, इन सीटों पर असंतुष्टों की संख्या ठीक- ठाक है, लेकिन कुछ लोग दूसरी पार्टियों के उम्मीदवारों की परदे के पीछे मदद कर रहे हैं.

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कुछ खुले आम तो कुछ चुपके से रहे बगावत

इसके विपरीत, कुछ ऐसे भी हैं जो खुले आम दूसरे पार्टी के प्रत्याशियों की मदद कर रहे हैं. इससे चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों की टेंशन बढ़ रही है. जानकारी ऐसा मान कर चल रहे हैं कि अगर ऐसा ही रहा तो पार्टियों के असंतुष्ट अपनी ही पार्टियों के राह में रोड़े पैदा कर देंगे. बात करें यदि नूंह की तो यहां सबसे ज्यादा असंतुष्ट हैं.

इनेलो के चार प्रमुख असंतुष्ट नेताओं में से एक को मना लिया गया हैं, वहीं बाकी तीन चुनावी मैदान से गायब नजर आ रहे हैं. यह अपनी ही पार्टियों का चुनावी माहौल खराब कर सकते हैं. इनमें से एक नेता ने खुले रूप से कांग्रेस प्रत्याशी को अपना समर्थन दिया है.

कांग्रेस को भी सता रही है चिंता

बात करें अगर कांग्रेस पार्टी की तो यहाँ भी एक असंतुष्ट अपनी पार्टी से दूरी बनाए हुए है. अंदर ही अंदर कोई भी खेल खेला जा सकता है. सभी की निगाहें इस पर बनी हुई है. भाजपा के लिए भी यही परेशानियां सामने आ रही है. यहाँ के प्रत्याशी संजय सिंह के ही गांव के टिकट का दावेदार चुनावी मैदान में नजर नहीं आ रहा है. अंदर ही अंदर क्या खिचड़ी पक रही है, यह चिंता चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को सता रही है.

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फिरोजपुर झिरका में भी बनी यही संभावनाएं

फिरोजपुर झिरका से इनेलो की टिकट मांग रहे एक नेता क्षेत्र को छोड़कर जा चुके हैं. बीजेपी के दो बड़े नेता पार्टी प्रत्याशी नसीम अहमद के लिए औपचारिकता मात्र के लिए प्रचार करते नजर आ रहे हैं. कांग्रेस की तरफ से टिकट नहीं मिलने के नाराज नेता चुनाव प्रचार में दिखाई नहीं दे रहे हैं. पुन्हाना में बीजेपी के टिकट के दावेदार यादराम गर्ग कांग्रेस को समर्थन का ऐलान कर चुके हैं. वहीं भाजपा के एक नेता निर्दलीय उम्मीदवार का सहयोग कर रहे हैं. कुल मिलाकर भीतर घाती अपनी ही पार्टियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

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Nisha Tanwar
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