रेवाड़ी | हरियाणा में कोई पार्टी सत्ता पर काबिज होती है, तो इसका रास्ता दक्षिण हरियाणा के अहीरवाल क्षेत्र के वोटर्स तैयार करते हैं. यहां के मतदाता जिस भी पार्टी का खुलकर समर्थन करते हैं, तो उस पार्टी को सत्ता हासिल करने से कोई नहीं रोक सकता है. लोकसभा चुनाव में 5 सीटों पर जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस पार्टी को यहां की 10 विधानसभा सीटों में से मात्र एक ही सीट पर 2 वोटों से जीत हासिल हुई थी.
लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भुपेंद्र हुड्डा और उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा ने अहीरवाल क्षेत्र में बीजेपी के किले को ढहाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी और अब विधानसभा चुनाव से पहले दीपेंद्र हुड्डा ने यहां अपनी सक्रियता बढ़ा दी है.
2014 में BJP की सभी 10 सीटों पर जीत
2014 के लोकसभा चुनावों में मोदी लहर का जबरदस्त बोलबाला रहा और इसका असर हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिला. जिसकी बदौलत बीजेपी दक्षिण हरियाणा की सभी 10 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब रही और पहली बार हरियाणा में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई. 2019 में आपसी गुटबाजी हावी रही, बीजेपी को रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और बादशाहपुर सीट पर हार का सामना करना पड़ा. पार्टी बहुमत के आंकड़े से दूर रही और JJP के सहयोग से सूबे में गठबंधन सरकार का गठन हुआ.
वहीं, 2000 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो यहां के वोटर्स ने INLD का बखुबी साथ निभाया और पार्टी ने 10 में से 6 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल कर सरकार बनाई. इसके अगले ही चुनाव में यहां के मतदाताओं का रूझान कांग्रेस पार्टी की ओर हो गया और भुपेंद्र हुड्डा के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ था.
हुड्डा ने सौंपे अहम पद
मुख्यमंत्री बनते ही भुपेंद्र हुड्डा ने दक्षिण हरियाणा के अधिकांश कांग्रेस विधायकों की कमान सीधे तौर पर अपने हाथ में लेते हुए उन्हें पदों के तोहफे देने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी. अनीता यादव और राव दान सिंह को सीपीएस बनाया गया था.
इस बार के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी को अहीरवाल क्षेत्र में जोर लगाने का ईनाम कोसली विधानसभा सीट पर जीत के रूप में मिला. यहां से जीत दर्ज करना उनके लिए बहुत बड़ी चुनौती मानी जा रही थी. 2019 के लोकसभा चुनावों में रोहतक सीट से जीत के प्रति आश्वस्त नजर आ रहे दीपेंद्र हुड्डा को कोसली विधानसभा सीट पर वोटों के बड़े मार्जिन ने हार में तब्दील कर दिया था.
गुटबाजी से निपटना चुनौती
कांग्रेस ने अहीरवाल क्षेत्र में बीजेपी के वर्चस्व को खत्म करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है. वहीं, भाजपा के लिए आंतरिक गुटबाजी इस बार उसे बड़ा नुक़सान पहुंचा सकती है. अहीरवाल की राजनीति में कद्दावर नेता राव इंद्रजीत सिंह को खुश करना भी बीजेपी के लिए चुनौती बना हुआ है. लोकसभा चुनाव के बाद से ही नाराज चल रहे राव इंद्रजीत सिंह की वजह से पार्टी को यहां कई सीटों पर नुकसान झेलना पड़ सकता है.
