कमाल का है यह पौधा- जड़ से लेकर पत्ते तक देंगे मुनाफा, पशुओं का डर न स्प्रे की जरूरत

रोहतक । आज के इस आधुनिक युग में कुछ किसान साथी परम्परागत खेती का त्याग कर नए-नए तरीके से खेती कर रहे हैं जिससे उनकी आमदनी में भी इजाफा हो रहा है. इसी कड़ी में रोहतक के मदीना गांव के किसान साथी राधेश्याम भारद्वाज ने नया प्रयोग करते हुए ऐसी फसल लगाई है, जिसकी जड़ से लेकर तने व पतों तक से आमदनी होगी. उन्होंने गांव में ही 15 एकड़ में खस की फसल लगाई है. बता दें कि यह एक औषधीय पौधा है जिसका तेल बाजार में 30 से 60 हजार रूपए प्रति लीटर बिकता है. जबकि तना व पता भी आसानी से बिक जाते हैं.

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डेढ़ से दो साल की समय-सीमा में यह पौधा तैयार हो जाता है. इस पौधे की खासियत यह है कि इसमें आपको किसी कीटनाशक दवाओं का स्प्रे करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और न ही इसको पशु खाते हैं. ऐसे में यह फसल किसानों के लिए बेहद सुरक्षित और फायदेमंद साबित हो सकती है. किसान राधेश्याम ने बताया कि करीब तीन वर्ष पूर्व उनके दिमाग में खेती में नया प्रयोग करने का आइडिया आया. इसके लिए उन्होंने बागवानी विभाग में सम्पर्क किया तो उन्होंने औषधीय पौधों की खेती करने का सुझाव दिया. उन्हें यह सुझाव रास आया और उन्होंने नया प्रयोग करते हुए खस की खेती करने का फैसला लिया.

2019 में 15 एकड़ में लगाई थी खस की फसल

राधेश्याम भारद्वाज ने बताया कि यूपी के बरेली में खस की खेती करने वाले एक किसान से विचार-विमर्श किया और फिर दिल्ली में इसके लिए मार्केट की नब्ज टटोली. सभी जानकारी हासिल करने के बाद उन्होंने दिसंबर 2019 में गांव में ही 15 एकड़ में खस की फसल लगाई. एक एकड़ में फसल लगाने पर उन्हें करीब 35 हजार रुपए खर्च आया. खस के पौधे उन्होंने यूपी के बरेली से ही खरीदें थे लेकिन अब इनसे ही भविष्य के लिए पौधे तैयार हो सकेंगे.

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बागवानी विभाग ने की सराहना

किसान राधेश्याम ने बताया कि इस फसल के बीच में ही उन्होंने गाजर व मूली की फसलें उगाकर अपनी आमदनी में इजाफा किया. उन्होंने कहा कि इस वर्ष के अंत तक इस सीजन की खस की पैदावार लेने के बाद फिर से खस की खेती करेंगे. उन्होंने दूसरे किसान साथियों को भी औषधीय पौधों की खेती करने के लिए प्रेरित किया. वहीं बागवानी विभाग के अधिकारियों ने भी किसान राधेश्याम की सराहना की.

मिट्टी की गुणवत्ता अनुसार फसल लगाएं

रोहतक के जिला बागवानी अधिकारी डॉ हवासिंह ने कहा कि राधेश्याम ने परम्परागत खेती का मोह त्याग कर नई खेती का रुझान किया है. औषधीय पौधों में शामिल खस की खेती से किसानों को मुनाफा पहुंचेगा और उनकी आमदनी में वृद्धि होगी. अन्य किसानों को भी मिट्टी की जांच करवाकर बागवानी फसर लगाकर लाभ कमाना चाहिए. विभाग की ओर से भी किसानों को बागवानी फसलें लगाने पर अनुदान राशि मुहैया करवाई जा रही है.

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Ajay Sehrawat
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मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ.