हरियाणा के इन गांवों में पंच बनते ही मौत का खौफ, चुनाव लड़ने के लिए कोई नहीं आया आगे

रोहतक | हरियाणा में आधुनिकता के इस दौर में जहां दुनिया भर में नए- नए आविष्कार हो रहें हैं. हर रोज नई तकनीक ईजाद की जा रही है तो वहीं दूसरी ओर रोहतक जिले के 2 गांवों में अंधविश्वास और डर के माहौल ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ही थाम दिया है.

Village Gaon 1

पंच बनते ही मौत का खौफ

इन दोनों ही गांवों में हालात ऐसे हो चुके हैं कि लोग पंचायत मेंबर (पंच) बनने से घबरा रहे हैं क्योंकि गांव में यह धारणा बन चुकी है कि जो पंच बना, उसकी मौत तय है. जिले के गांव सुंदरपुर और इस्माइला 9B में पंच पद के लिए एक भी नामांकन- पत्र दाखिल नहीं हुआ. हालांकि, जिला प्रशासन द्वारा खाली पदों को भरने के लिए प्रक्रिया शुरू की गई थी लेकिन इन दोनों गांवों में सन्नाटा पसरा रहा. न कोई उम्मीदवार सामने आया और न ही किसी ने नामांकन-पत्र दाखिल करने की हिम्मत जुटाई.

गांव सुंदरपुर के वार्ड नंबर- 1 में पिछले करीब 10 साल से पंच का पद खाली है, जबकि इस्माइला 9B के वार्ड नंबर- 13 में यह स्थिति पिछले 8 साल से बनी हुई है.

पंच बनना अशुभ मान रहे लोग

सुंदरपुर गांव के सरपंच प्रतिनिधि प्रवीन राठी ने बताया कि इन पदों पर चुने गए पंचों की कुछ समय बाद मृत्यु हो गई थी. सुंदरपुर में तो ऐसी तीन घटनाएं होने का दावा किया जा रहा है, जिससे लोगों के मन में डर और गहरा बैठ गया है. पिछली योजना में टीनू पंच बना हुआ था, बीमारी से उसकी मौत हो गई थी. इससे पहले पंच रमेश की भी बीमारी से मृत्यु हुई थी. वहीं, इससे पहले भी पंच पद पर यह स्थिति बन चुकी है.

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ग्रामीणों के बीच यह बात फैल चुकी है कि इन वार्डों में पंच बनना अशुभ है. यही कारण है कि लोग इस जिम्मेदारी से दूरी बनाए हुए हैं. भले ही यह महज संयोग हो, लेकिन गांव में इसे एक अलौकिक संकेत की तरह देखा जा रहा है. दिलचस्प बात यह है कि जिले के अन्य 8 वार्ड में खाली पड़े पंच पदों पर सर्वसम्मति से चयन हो गया और बिना किसी चुनाव के पंच चुन लिए गए.

रोहतक जिले के गांव सुंदरपुर व इस्माइला 9B में डर के चलते पंच नहीं बन पा रहे हैं. गांवों के मौजिज लोगों से बात की गई तो उन्होंने भी स्वीकार किया कि ग्रामीणों में मृत्यु का भय है. जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि अंधविश्वास के चलते कोई भी व्यक्ति नामांकन भरने को तैयार नहीं हुआ. ग्रामीणों की काउंसलिंग करवाई जाएगी और उन्हें समझाया जाएगा कि यह महज संयोग है, न कि कोई अभिशाप. जागरूकता और सही जानकारी के जरिए ही इस डर को खत्म किया जा सकता है- राजपाल चहल, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी, रोहतक

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Ajay Sehrawat
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मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ.