रोहतक लोकसभा सीट पर चेहरों और चौधर की जंग में कौन सी पार्टी को मिलेगी जीत, पढ़ें ये खास रिपोर्ट

रोहतक | हरियाणा की सबसे हॉट लोकसभा सीट रोहतक, जो 5 जाट बाहुल्य इलाकों जींद, सोनीपत, झज्जर, भिवानी और हिसार से भी घिरी हुई है, पर चुनाव की जंग रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुकी है. पूर्व मुख्यमंत्री भुपेंद्र हुड्डा 4 बार इस लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं तो वहीं उनके पिता स्व. रणबीर सिंह हुड्डा ने 2 बार और बेटे दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने 3 बार रोहतक लोकसभा सीट से जीत हासिल की है. बीजेपी की बात करें तो 1962 में जनसंघ के बाद साल 2019 में पार्टी ने रोहतक लोकसभा के चुनावी रण को फतह करने में सफलता मिली थी.

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कांटे की टक्कर

लंबे अर्से के बाद बीजेपी को रोहतक लोकसभा सीट से जीत दिलाने वाले अरविंद शर्मा इस बार भी पार्टी की ओर चुनावी रण में हैं, जबकि पिछली बार हार का सामना करने वाले मौजूदा राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा को कांग्रेस पार्टी ने फिर से अपना प्रत्याशी घोषित किया है. इस सीट पर दोनों पार्टियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है. रोहतक में हुड्डा परिवार का राजनीतिक दबदबा होने के बावजूद इस सीट पर किसी भी पार्टी के प्रत्याशी की जीत- हार में जाट व गैर- जाट के समीकरण प्रभावी रहने वाले हैं.

हुड्डा परिवार ने झोंकी पूरी ताकत

हरियाणा में छठे चरण के तहत, 25 मई को होने वाले मतदान में अब कुछ ही दिन बाकी हैं. रोहतक लोकसभा के चुनावी रण को फतह करने के लिए हुड्डा परिवार ने पूरी ताकत झोंक दी है, जबकि बीजेपी खासकर पूर्व सीएम मनोहर लाल किसी भी सूरत में इस लोकसभा सीट को खोना नहीं चाहते हैं.

हरियाणा कांग्रेस के दिग्गज नेताओं रणदीप सुरजेवाला, किरण चौधरी, कुमारी शैलजा, चौधरी बीरेंद्र सिंह आदि की बात करें तो यहां पर अभी तक कोई भी चुनाव प्रचार के लिए नहीं पहुंचा है. ऐसे में रोहतक का रण जीतने के लिए हुड्डा परिवार अकेले ही संघर्ष कर रहा है.

हुड्डा परिवार के लिए आसान नहीं है राह

हुड्डा परिवार के लिए रोहतक सीट से जीत हासिल करना किसी चुनौती से कम नहीं दिख रहा है. एक समय भुपेंद्र हुड्डा के लिए अपनी किलोई विधानसभा सीट खाली करने वाले पूर्व मंत्री कृष्णमूर्ति हुड्डा कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम चुके हैं. रोहतक जिले में INLD के कद्दावर नेता रहे सतीश नांदल भी बीजेपी में शामिल हो चुके हैं.

वहीं, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष रहे सुभाष बराला और ओमप्रकाश धनखड़ का साथ भी अरविंद शर्मा को मजबूती प्रदान कर रहा हैं. वहीं, अरविंद शर्मा ने पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर का मनोहर लाल से मनमुटाव दूर करवा दिया है, जिसका फायदा उन्हें मिल रहा है. दूसरी ओर JJP पार्टी ने रोहतक लोकसभा सीट से जाट प्रत्याशी को टिकट दी है, जो कांग्रेस पार्टी के जाट वोट बैंक में सेंधमारी करेगा. हालांकि, दीपेंद्र हुड्डा मतदाताओं के सामने उनके लोकल होने के साथ चौधर इस संसदीय क्षेत्र में वापस लाने का मुद्दा उठा रहे हैं, लेकिन फिर भी जीत हासिल करने के लिए खूब पसीना बहा रहे हैं.

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जाट और गैर- जाट राजनीति के बन रहे समीकरण

रोहतक की महम, गढ़ी सांपला किलोई, रोहतक और कलानौर, झज्जर जिले की बहादुरगढ़, बादली, झज्जर व बेरी तथा रेवाड़ी जिले की कोसली विधानसभा सीट के क्षेत्रफल में यह लोकसभा सीट फंसी हुई है. हालांकि, पिछले चुनाव में दीपेंद्र हुड्डा को मात्र साढ़े 7 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा था लेकिन कोसली विधानसभा क्षेत्र से दीपेंद्र करीब 75 हजार वोटों से पिछड़ गए थे और यही बढ़त‌ आखिर में जाकर अरविंद शर्मा की जीत का कारण बनी थी.

इस बार दीपेंद्र हुड्डा का पूरा फोकस कोसली विधानसभा से ज्यादा- से- ज्यादा वोट हासिल करने पर है. वहीं, अरविंद शर्मा भी पिछले बार से ज्यादा वोट इस बार कोसली से हासिल करने के लिए जुटे हुए हैं. अरविंद शर्मा को केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत का सहारा है, जबकि दीपेंद्र हुड्डा को पूर्व मंत्री जगदीश यादव और भिवानी से कांग्रेस प्रत्याशी राव दान सिंह के प्रभाव के मत मिलने की पूरी उम्मीद है.

इस सीट पर गैर जाट वोटर्स निर्णायक होने के बावजूद भी जाटों के वोटों का पूरा असर रहता है. करीब 18 लाख वोटरों में 7 लाख जाट, तीन लाख एससी, पौने दो लाख अहीर, सवा लाख से ज्यादा पंजाबी व इतने ही ब्राह्मण वोट रोहतक में किसी भी समीकरण को गड़बड़ाने के लिए काफी हैं. ऐसे में रोहतक लोकसभा की चुनावी रण आए दिन दिलचस्प होती जा रही है.

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Ajay Sehrawat
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मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ.