सोनीपत | हरियाणा के सोनीपत जिले में धोती- कुर्ता वाला पहलवान ताऊ सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियां बटोर रहा है. सिक्स पैक वाला यह ताऊ रोजाना 25 किलोमीटर की दौड़ और 800 सपाटे लगाता है. भरा हुआ LPG सिलेंडर, पुराने पत्थर की ओखली उठाकर और पानी से भरी बाल्टियों को भारी- भरकम मूसल में टांगकर ताऊ रोजाना देशी अंदाज में कसरत करता है.
गांव जठेड़ी निवासी 51 वर्षीय संजय उर्फ काला पहलवान ने बताया कि उन्हें बचपन से ही पहलवानी का शौक था और इसे पूरा करने के लिए वो अपने गुरु रघुबीर सिंह रायपुरिया के अखाड़े में भी गए थे लेकिन घर के हालात के कारण अखाड़ा छोड़ना पड़ा. पहलवान ताऊ ने आगे बताया कि कई बार घर में देशी घी नही होता था तो सरसों का तेल पीकर अखाड़े में जोर-आजमाइश करते थे. इस अधूरे सपने का मलाल आज भी उनके दिल में है.
दिल्ली मैराथन में लेंगे हिस्सा
संजय पहलवान ने बताया कि साल 2006 में उनकी शादी हो गई थी. शादी के बाद दो बेटियां और एक बेटा है. पहलवानी छूटने के कई साल बाद दिमाग में विचार आया कि जो बचपन या जवानी में नहीं कर सकें, अब उस शौक को पूरा क्यों न किया जाए. इसी सोच के साथ युवाओं के संग स्टेडियम में जाकर प्रैक्टिस करना शुरू कर दिया. अब दिल्ली में होने वाली 42 किलोमीटर मैराथन में एंट्री भरी है. उन्होंने बताया कि घर में देशी कसरत के जुगाड़ के साथ खाना-पीना भी एकदम देशी है. डाइट में वे रोजाना मुनक्का और मौसमी का जूस पीते हैं.
वीडियो वायरल होने पर हुएं मशहूर
ताऊ पहलवान ने बताया कि कुछ खिलाड़ियों ने स्टेडियम में प्रैक्टिस करते हुए की वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दी, जिससे लोग उन्हें जानने लगे. फिर कुछ खिलाड़ियों के कहने पर उन्होंने खुद ही वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करना शुरू कर दिया. बस फिर क्या था, किसी ने उन्हें देशी पहलवान, रनिंग ताऊ और हरियाणवी सलमान खान कहना शुरू कर दिया. हालांकि, कुछ लोगों ने कमेंट में फेक बताते हुए लिखा कि कोई इस उम्र में इतनी कसरत कैसे कर सकता है. ऐसे लोगों से मैं हाथ जोड़कर कहना चाहता हूं कि आप स्टेडियम पहुंचे और गिन लो कि मैं मैदान के कितने चक्कर लगाता हूं और कितने सपाटे मारता हूं.
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ओ गया ताऊ
संजय पहलवान ने बताया कि स्टेडियम में जाकर 20-25 किलोमीटर की दौड़ लगाना उनके लिए वार्मअप करने जैसा ही है. वो युवाओं के साथ फर्राटा दौड़ भी लगाते हैं. सोशल मीडिया पर उनके कई ऐसे वीडियो वायरल हैं जिनमे महिला एथलीट तालियां व सीटियां बजाकर उनका हौसला बढ़ा रही हैं और किलकी मारते हुए कह रही है कि देखो वो गया पहलवान ताऊ.
उन्होंने आगे बताया कि दौड़ लगाने के बाद वह ट्रैक पर ही हाथ से चलने वाली जूसर मशीन में मौसमी का जूस निकाल कर पीते हैं. मौसमी का जूस उनकी सबसे महत्वपूर्ण खुराक है. इससे वे खुद को तरोताजा महसूस करते हैं. वे युवाओं को भी यहीं सलाह देते हैं कि दूध से ज्यादा जरूरी जूस होता है. इसके अलावा घर पर भिगोकर रखें गए करीब 75 बादामों को कुंडी में रगड़ा लगाकर पीते हैं.
बीमारी के सवाल पर उन्होंने हंसते हुए कहा कि भगवान की दया से आज तक ऐसी नौबत ही नहीं आई है. उन्हें तो अपने ब्लड ग्रुप का भी नहीं पता हैं क्योंकि कभी जरूरत ही नहीं पड़ी. भविष्य में भी इसी तरह कसरत कर खुद को निरोगी और स्वस्थ रखने का प्रयास जारी रहेगा.
