हरियाणा के लाल बजरंग पूनिया से पूरे देश को गोल्ड की उम्मीद, कभी नहीं थे घी खरीदने तक के पैसे

सोनीपत ।  पहलवान बजरंग पूनिया, एक ऐसा नाम जी कई युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है, पहलवानी में अपना भविष्य बनाने का लक्ष्य रखे युवा उन्हें अपना आदर्श मानते हैं. आज से टोक्यो ओलंपिक की शुरुआत हुई है और देश के लिए गोल्ड लाने का सबसे अधिक विश्वास देशवासियों को इसी पहलवान पर है. विश्व प्रसिद्ध पहलवान बजरंग पूनिया की सफलता के पीछे एक संघर्ष भरी कहानी भी है.

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पहलवान बजरंग पूनिया मूल रूप से झज्जर के गांव खुडन निवासी है लेकिन लंबे समय से सोनीपत में परिवार के साथ रहते हैं. बजरंग को कुश्ती विरासत में मिली. उनके पिता बलवान पूनिया अपने समय के नामी पहलवान रहे. लंबे समय तक बजरंग ने ओलंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त अखाड़े में पहलवानी की लेकिन बाद में वो वहां से अलग हो गए. बजरंग की कुश्ती की शैली योगेश्वर दत्त से मिलती-जुलती है.

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बजरंग पूनिया की सफलता के पीछे एक संघर्ष भरी कहानी भी है. बजरंग के पिता पहलवान जरूर थे लेकिन घर की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी. पहलवानी के लिए जरूरी डाइट लेने तक के पैसे नहीं थे लेकिन पिता ने सोच लिया था कि उनका सपना अब बेटा बजरंग पूनिया पूरा करेगा. पिता के मन में बस एक ही ख्वाब था कि उनका बेटा देश के लिए पदक जीते. लेकिन दूसरी ओर घर के हालात ऐसे थे कि पिता के पास बेटे को घी खिलाने तक के पैसे नहीं थे. बजरंग के पिता उसको अच्छी डाइट उपलब्ध कराने के लिए बस के बजाय साइकिल पर नौकरी के लिए जाया करते और जो भी छोटी-मोटी बचत होती उसे बजरंग डाइट पर खर्च करते थे. बाप की जिद और बेटे के समर्पण से मुश्किल रास्ता अब आसान लगने लगा. बाद में ओलंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त की नजर बजरंग पूनिया पर पड़ी और बजरंग की आगे की तैयारियां उन्हीं के देखरेख में हुई.

बजरंग पूनिया ने कठिनाइयों में जिस समर्पण से मेहनत की उसी का फल है कि आज भी विश्व में नंबर.1 पहलवान है. देश-विदेश में बजरंग को चाहने वाले उनके फैंस की कमी नहीं. कुश्ती के मैदान में उतरते ही बज-रंग-बज-रंग की धुन सुनाई देने लगती है. बजरंग ने अपने करियर में कई बार देश को गौरवान्वित होने का मौका दिया. बजरंग तीन बार विश्व पदक विजेता और एक बार का एशियाई खेलों के चैंपियन रह चुके हैं. सितंबर 2019 में कजाकिस्तान में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप पहला स्थान प्राप्त किया. रोम के माटियो पैलिकोन रैंकिंग सीरीज में लगातार दो वर्षों से स्वर्ण पदक अपने नाम किए हैं. इसके साथ ही दो एशियाई चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल किए है.

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पहलवान बजरंग पूनिया टोक्यो ओलंपिक में भारत की तरफ से कुश्ती की चुनौती का नेतृत्व करेंगे. वो पुरुषों की 65 किग्रा फ्रीस्टाइल कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा करते हुए नजर आएंगे. बजरंग वर्तमान में 65 किग्रा फ्रीस्टाइल कैटेगरी टॉप-रैंक के पहलवान हैं. टोक्यो ओलंपिक में पदक हासिल करने के लिए प्रबल दावेदार एथलीटों में से एक हैं. पूरे देशवासियों की नजर हरियाणा के लाल बजरंग पूनिया पर टिकी हुई है, उम्मीद यही की हमेशा की तरह बजरंग अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें और देश के लिए ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीते.

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