गोल्ड मेडल से चूका हरियाणा का लाल रवि दहिया, भारत को रवि ने दिलाया टोक्यो ओलंपिक का दूसरा सिल्वर पदक

Tokyo Olympics 2020, सोनीपत | टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारत की सबसे बड़ी गोल्ड मेडल की उम्मीद हरियाणा के पहलवान रवि कुमार दहिया के हाथ फाइनल मुकाबले में निराशा लगी है. लेकिन इस ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन करते हुए रवि ने कुश्ती खेल में ओलंपिक के इतिहास में दूसरा सिल्वर पदक देश के नाम किया है.

ravi dahiya

कुछ ही देर पहले 4:20 पर फ्रीस्टाइल 57 किग्रा वर्ग में फाइनल मुकाबला खेला गया. फाइनल मुकाबले में भारत के पहलवान रवि कुमार दहिया के सामने रूस के पहलवान जावुर युगुऐव थे. मुकाबले के पहले राउंड में रूस के पहलवान ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए 4-2 से मुकाबले में बढ़त बना ली. दूसरे राउंड में रूसी पहलवान ने फिर से बढ़त बढ़ाते हुए 7-4 स्कोर कर दिया. अंतिम क्षणों में रवि ने मुकाबले में बढ़त बढ़ाने की कोशिश की लेकिन समय समाप्त हो गया और रूस के पहलवान जावुर युगुऐव ने मुकाबले को 7-4 से जीत लिया.

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आज भले ही रवि इस फाइनल मुकाबले में हार गए लेकिन उन्होंने कई मायनों में इतिहास रच दिया. रवि ने शुरुआत से ही टोक्यो ओलंपिक 2020 में शानदार प्रदर्शन कर फाइनल में जगह बनाई. रवि ओलंपिक के इतिहास में भारत के लिए सिल्वर जीतने वाले दूसरे पहलवान बने हैं. भारत के लिए सबसे पहले दिग्गज पहलवान सुशील कुमार ने लंदन ओलंपिक 2012 में सिल्वर मेडल जीता था.

ओलंपिक में रवि का शानदार सफर

रवि कुमार ने पुरुषों के फ्रीस्टाइल 57 किग्रा वर्ग के सेमीफाइनल मुकाबले में कजाखस्तान के नूरइस्लाम सनायेव को हराकर भारत के लिए रजत पदक पक्का किया और फाइनल गोल्ड मेडल मुकाबले में जगह बनाई थी. रवि ने सेमीफाइनल मुकाबले में नूरइस्लाम को विक्ट्री बाई फॉल के माध्यम से 7-9 से हराया. इससे पहले रवि का प्री क्वार्टर फाइनल मुकाबला कोलंबिया के ऑस्कर टाइग्रेरोस से हुआ. इस मुकाबले में रवि ने कोलंबिया के पहलवान को 11-2 के बड़े अंतर से एक तरफा मात दी. प्री क्वार्टर फाइनल में शानदार जीत के बाद रवि का क्वार्टर फाइनल मुक़ाबला बुल्गारिया के जॉर्जी वांगेलोव के साथ हुआ. इस मुकाबले में भी उन्होंने 14-4 से बुल्गारिया के जॉर्जी वांगेलोव को आसानी से हरा दिया.

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रवि कुमार दहिया का जन्म 12 दिसंबर 1997 को हरियाणा के सोनीपत जिले के नहरी गांव में हुआ. रवि दहिया के पिता का नाम राकेश दहिया है. रवि के परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी. उनके पिता किसान थे लेकिन वह दूसरों के किराए के जमीन पर खेती करते थे क्योंकि उनके पास खेती करने के लिए जमीन नहीं थी. रवि सोनीपत के जिस इलाके से आते थे वहां से फोगाट बहनें, बजरंग पुनिया, योगेश्वर दत्त जैसे दिग्गज पहलवान भी निकले हैं.

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