सविता पूनिया ने रचा इतिहास, सात पैनल्टी कॉर्नर को रोककर किया कमाल

सिरसा | टोक्यो ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को 1-0 से हराने में सिरसा के जोधकां गांव की हिसार के साईं में प्रैक्टिस करने वाली गोलकीपर सविता पूनिया का अहम योगदान रहा. सविता ने सात पैनल्टी कॉर्नर को रोककर कमाल किया. सविता ने टोक्यो ओलंपिक तक बातचीत की.

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सविता ने वर्ष 2004 में हॉस्टल में रहकर प्रैक्टिस करने के दौरान मन नहीं लगने पर खेलने से इंकार कर दिया था. जिस पर पिता महेंद्र सिंह उससे नाराज हो गए. कोच व पिता की लगातार हौसला बढ़ाने पर सविता ने फिर से प्रैक्टिस शुरू की. दूसरी बात ओलंपिक में हिस्सा लेकर सविता ने साथ पैनल्टी कॉर्नर को रोककर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई.

सविता का ओलंपिक तक का सफर

सविता ने वर्ष 2004 में हॉकी की प्रैक्टिस शुरू की थी. कुछ दिन तक वह हॉस्टल में रही. मगर परिवार से दूर रहने के कारण उसका प्रैक्टिस में मन नहीं लग रहा था. जिस पर सविता ने प्रैक्टिस छोड़ने पर मन बना लिया था. इस बात का पता होने पर पिता महेंद्र सिंह नाराज हो गए और कुछ देर तक उन्होंने सविता से बात तक नहीं की. इसके बाद पिता और कोच ने सविता का हौसला बढ़ाया तथा साथ ही कहा- मेहनत के बल पर तू एक दिन विदेश तक में भारत का नाम रोशन करेगी.

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लगातार हौसला बढ़ाने के कारण सविता ने फिर से मन लगाकर हॉकी की प्रैक्टिस शुरू कर दी. मेहनत का नतीजा यह रहा कि दक्षिण अफ्रीका में जून 2006 में आयोजित 4 देशों की स्पार कप प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया. इसके बाद चीन के खिलाफ एशिया कप हॉकी के फाइनल में जीत दिलाने पर बेस्ट गोलकीपर बनी. वर्ष 2018 में अर्जुन पुरस्कार मिला. अब दूसरी बार भारतीय हॉकी टीम में गोल कीपर के रूप में चयनित होकर देश को गोल्ड मेडल दिलाने की कोशिश कर रही है. कोच के सही मार्गदर्शन और टीम के सभी सदस्यों के सहयोग से टीम ओलंपिक में गोल्ड मेडल हासिल करेगी. – सविता पूनिया, गोलकीपर भारतीय हॉकी टीम

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