यमुनानगर | हिंदुस्तान वैसे तो मंदिरों का देश है. यहां शायद ही कोई ऐसा शहर या गांव हो जहां मंदिरों की भरमार न हो. लोग अपनी- अपनी श्रद्धा के हिसाब से अपने देवी- देवताओं की पूजा करते हैं. हरियाणा में भी ऐसे कई मंदिर हैं जिनके प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा है. यमुनानगर जिले में भी एक ऐसा मंदिर है, लेकिन इसकी खास बात यह है कि यह कोई आम मंदिर नहीं है. यहां किसी देवी- देवता की पूजा नहीं होती बल्कि यहां शहीदों की पूजा की जाती है.
साल 2000 में हुई थी स्थापना
गुमथला राव गांव में शहीदों को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से इंकलाब मंदिर की स्थापना की गई है. मां भारती के जिन वीर सपूतों ने देश को आजाद कराने के लिए अपने प्राणों की कुर्बानी दी, उन शहीदों को यहां सम्मान दिया गया है. इंकलाब शहीद स्मारक चैरिटी क्लब के संस्थापक वरयाम सिंह ने बताया कि गांव में सबसे पहले शहीदों के मंदिर की स्थापना साल 2000 में की गई थी. सबसे पहले यहां शहीदे- आज़म भगत सिंह की मूर्ति स्थापित की गई और फिर धीरे- धीरे करीब ढाई सौ शहीदों की मूर्तियां लगा दी गईं.
250 पोर्टेबल फोटो और स्टैच्यू
मंदिर में भारत माता की प्रतिमा, भगत सिंह, सुखदेव, सुभाष चंद्र बोस, मंगल पांडे सहित करीब 20 प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं. कुल मिलाकर 250 पोर्टेबल फोटो और स्टैच्यू इस मंदिर में लगाए गए हैं, जहां लोग श्रद्धाभाव से शहीदों की पूजा करते हैं. वरयाम सिंह ने बताया कि गांव में किसी प्रकार के देवी- देवता का मंदिर नहीं है. जब गांव में इंकलाब मंदिर की नींव रखी गई थी, तब यहां कोई मंदिर, गुरुद्वारा या अन्य धार्मिक स्थल नहीं था. हालांकि अब समय बीतने पर गांव में गुरुद्वारा बन चुका है.
दूर दर्ज से भी आते हैं लोग
उन्होंने कहा कि उनका गांव कुरुक्षेत्र, कैथल और यमुनानगर की सीमा पर स्थित है, जिसे देखने के लिए हरियाणा ही नहीं, बल्कि दूर- दराज के लोग भी आते हैं. यहां आने वाले लोगों के लिए रुकने की नि:शुल्क व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है. वरयाम सिंह के अनुसार, उनके गांव में हर धर्म और जाति के लोग मिल- जुलकर रहते हैं. यह मंदिर भी एकता का प्रतीक बन चुका है, क्योंकि यहां शहीदों को सम्मान देने हर धर्म के लोग पहुंचते हैं.
स्कूल जाने से पहले बच्चे करते हैं नमन
इतना ही नहीं, बल्कि स्कूल जाने से पहले बच्चे मंदिर में आकर शहीदों को नमन करते हैं. उसके बाद, पढ़ाई शुरू करते हैं. गांव की स्थानीय महिला रजनी ने बताया कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हमारे गांव में देश का इकलौता शहीद मंदिर बना हुआ है. वहीं, रश्मीत कौर ने कहा कि वह हर रोज अपने माता- पिता और परिजनों के साथ यहां आकर शहीदों के सामने शीश झुकाती हैं.
