चंडीगढ़ | हरियाणा में पराली (धान के फसल अवशेष) निस्तारण की दिशा में खट्टर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. थर्मल पॉवर स्टेशनों और धान के भूसे का उपयोग करने वाले अन्य संयंत्रों को आपूर्ति के लिए पराली खरीदने के लिए दरें निर्धारित कर दी है. सरकार के इस कदम से प्रदेश के किसान को भी फायदा पहुंचेगा और पराली जलाने की घटनाओं में बड़े स्तर पर कमी आएगी.
कृषि विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ सुमिता मिश्रा ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं. इन आदेशों के मुताबिक, हरियाणा के किसानों को पराली की बिक्री से उसकी कुल लागत पर प्रति टन 500 रुपए अतिरिक्त मिलेंगे. सरकार ने कटिंग, बेलिंग, लोडिंग से लेकर डिपो पर रखरखाव तक की लागत राशि निर्धारित कर दी है.
| डिटेल्स | पराली की लागत प्रति टन (रुपए में) |
| कटिंग, बेलिंग, लोडिंग अनलोडिंग और डिपो तक ट्रांसपोर्टेशन (15 km तक) | 650 |
| एग्रीगेटर को लाभ | 100 |
| किसानों को लाभ | 500 |
| डिपो पर रखरखाव संचालन/ खर्च | 250 |
| कुल खर्च | 2500 |
नोट: अगर कोई संयंत्र या इकाई 20% से कम नमी वाले धान की पराली खरीदना चाहता है तो उसे अतिरिक्त 500 रुपए प्रति टन अधिमूल्य के रुप में यानि 3,000 रुपए प्रति टन के अनुसार भुगतान करना होगा.
