महाभारत काल से जुड़ा है हरियाणा के सिही गांव का इतिहास, जन्मेजय ने यहीं करवाया था नाग यज्ञ

फरीदाबाद | महाभारत काल के दौरान पांडवों द्वारा कौरवों से यह शर्त रखी गई थी कि यदि उन्हें 5 गांव दे दिए जाएं, तो वे उसी से संतुष्ट हो जाएंगे. कौरवों द्वारा इस शर्त को अस्वीकार कर दिया गया था. उसके बाद का इतिहास सबको पता ही है. जिन 5 गांवों का हमने ऊपर जिक्र किया है, उनमें हरियाणा के फरीदाबाद का सिही गांव भी शामिल है.

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श्रीपद के नाम से थी पहचान

उस समय इस गांव को श्रीपद के नाम से जाना जाता था. इस गांव का इतिहास महाभारत युग से जुड़ा हुआ है. ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी खास बात यह है कि यह महान संत और कवि सूरदास की जन्मभूमि है. सूरदास ने ब्रजभाषा को हिंदी साहित्य में नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया था. उन्होंने जिन रचनाओं का निर्माण किया उनमें भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं को बड़े ही सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया गया है. यही कारण है कि यह गांव ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक दृष्टि से भी अत्यधिक महत्व रखता है.

जन्मेजय ने करवाया था नाग यज्ञ

इस गांव से जुड़ी एक और ऐतिहासिक घटना भी प्रचलित है. महाभारत के बाद जब महाराज परीक्षित की मृत्यु हो गई, तब उनके पुत्र जन्मेजय ने नागों के वंश को समाप्त करने के लिए यहां नाग यज्ञ करवाया था. इस गांव को इतिहासकार टी.वी. महालिंगम जैसे विद्वानों ने प्राचीन नगरियों में शामिल किया है. इसे पहले नाग श्री के नाम से भी जाना जाता था. यहां मुनि श्रमिक का आश्रम भी था. यहां से नागों की हड्डियों के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं. गांव के स्थानीय निवासी ज्ञान प्रकाश ने बताया कि इस गांव का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है. यहां नाग यज्ञ का आयोजन करवाया गया था.

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स्वतंत्रता संग्राम में भी रहा योगदान

यहां स्थित नागेश्वरी मंदिर को अब हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता है. यहां के महाराज बलराम सिंह और शहीद राजा नाहर सिंह जैसे वीरों ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश की आज़ादी के लिए लड़ाई लड़ी. प्रसिद्ध कवि मैथिलीशरण गुप्त और अन्य कवियों ने 1952 में सूरदास की जन्मस्थली की खोज की थी. इसके बाद, 1954 में सूर स्मारक समिति का गठन हुआ जो हर वर्ष सूरदास जी के जन्मोत्सव का आयोजन करती है. यहां हरियाणा साहित्य अकादमी के सहयोग से समय- समय पर कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.

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Nisha Tanwar
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