नई दिल्ली | दिल्ली- मुंबई एक्सप्रेसवे पर राजस्थान के कोटा के पास मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के नीचे बनी देश की पहली 8 लेन सुरंग को सुरक्षात्मक जांच के बाद सीमित रूप से चालू कर दिया गया है. शुरुआती चरण में इस सुरंग से कारों और जरूरत पड़ने पर अन्य आपातकालीन बड़े वाहनों को गुजरने की अनुमति दी गई है. कुछ दिनों तक परीक्षण के बाद इसे सभी प्रकार के वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा. इस सुरंग के शुरू होने से दिल्ली से वडोदरा तक का सफर पहले की तुलना में काफी आसान और तेज हो जाएगा.

अब वाहनों को मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के 25 किलोमीटर लंबे घुमावदार रास्ते से नहीं गुजरना पड़ेगा. 4.9 किलोमीटर लंबी इस सुरंग से सीधे आवागमन होने के कारण यात्रा का समय और ईंधन दोनों की बचत होगी. साथ ही वाहनों का प्रदूषण भी कम होगा.
देश की पहली वाइल्डलाइफ टनल
दिल्ली से वडोदरा पहुंचने में करीब 20 से 22 घंटे का समय लगता है. सुरंग और एक्सप्रेसवे का यह हिस्सा पूरी तरह चालू होने के बाद यही दूरी लगभग 10 से 12 घंटे में पूरी की जा सकेगी. 1380 किलोमीटर लंबे दिल्ली- मुंबई एक्सप्रेसवे का निर्माण देश की राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई के बीच बेहतर कनेक्टिविटी के लिए किया जा रहा है. इस परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के नीचे सुरंग का निर्माण था. वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन को प्रभावित किए बिना निर्माण कार्य पूरा करना बड़ी चुनौती रहा जिसके कारण परियोजना में कुछ देरी भी हुई.
मिली नई रफ्तार
सुरक्षा के लिहाज से सुरंग में 9 इमरजेंसी क्रॉस- पैसेज, आधुनिक वेंटिलेशन सिस्टम और पॉल्यूशन कंट्रोल सेंसर लगाए गए हैं. यह ट्विन- ट्यूब सिस्टम पर आधारित है जिसमें 4- 4 लेन की दो अलग- अलग सुरंगें बनाई गई हैं. सुरंग के ऊपर से बाघ और अन्य वन्यजीव पहले की तरह सुरक्षित रूप से आवाजाही कर सकेंगे. फिलहाल, सुरंग में मोबाइल नेटवर्क की स्थिति का भी परीक्षण किया जा रहा है. यदि कहीं नेटवर्क की समस्या सामने आती है तो टेलीकॉम कंपनियों को सुरंग के भीतर आवश्यक सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए जाएंगे.
परीक्षण सफल रहने के बाद सुरंग को जल्द ही सभी वाहनों के लिए विधिवत खोल दिया जाएगा. दिल्ली- मुंबई एक्सप्रेसवे हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात के कई प्रमुख शहरों को जोड़ रहा है. इसके अलावा, अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों को भी इस एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना पर काम जारी है- संदीप अग्रवाल, परियोजना निदेशक (कोटा), NHAI