चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार ने प्रदेश के अस्थायी कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए जॉब सिक्योरिटी (सेवा सुरक्षित) पत्र जारी करने की अंतिम तिथि एक बार फिर बढ़ा दी है. अब पात्र कर्मचारियों को जॉब सिक्योरिटी देने की प्रक्रिया 15 अगस्त, 2026 तक पूरी की जाएगी. इससे पहले यह समय सीमा 15 जून, 2026 तक निर्धारित थी, लेकिन तय अवधि बीत जाने के बावजूद अधिकांश पात्र कर्मचारियों को सेवा सुरक्षित पत्र जारी नहीं हो सके थे. सरकार ने सबसे पहले जॉब सिक्योरिटी पत्र जारी करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल, 2026 तय की थी. अब नई समय सीमा 15 अगस्त, 2026 तय होने के बाद विभागाध्यक्षों को लंबित मामलों का सत्यापन तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं.

बाद में प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर इसे 15 मई और फिर 15 जून, 2026 तक बढ़ाया गया. हालांकि, 15 जून तक भी पात्र कर्मचारियों को जॉब सिक्योरिटी पत्र जारी नहीं हो पाए. ऐसे में सरकार ने अब नई समय सीमा 15 अगस्त, 2026 तय कर दी है.
हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा चुनाव से पहले 15 अगस्त, 2024 को करीब 1.20 लाख अस्थायी कर्मचारियों को जॉब सिक्योरिटी देने के उद्देश्य से अध्यादेश जारी कराया था. इस कानून के तहत उन कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया, जिन्होंने 15 अगस्त, 2024 तक लगातार पांच वर्ष की सेवा पूरी कर ली थी. इसमें आउटसोर्सिंग पार्ट- 1, पार्ट- 2 और हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) के माध्यम से कार्यरत ऐसे कर्मचारी शामिल हैं, जिनका मासिक वेतन 50 हजार रुपये से कम है और जो विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों तथा प्राधिकरणों में कार्यरत हैं.
नई तारीख घोषित
सरकार ने सरकारी कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में कार्यरत एक्सटेंशन लेक्चरर तथा गेस्ट लेक्चरर के लिए भी अलग से कानून बनाकर जॉब सिक्योरिटी का प्रावधान किया था. हालांकि, 16 अगस्त, 2024 को विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के कारण प्रक्रिया प्रभावित हुई और केवल कुछ कर्मचारियों को ही सेवा सुरक्षित पत्र मिल सके. बाद में सरकार ने पात्र कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन और सत्यापन की व्यवस्था शुरू की.
शुरुआत में आवेदन, दस्तावेज सत्यापन और विभागीय मंजूरी की प्रक्रिया में कई तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतें सामने आईं. पहले डीडीओ स्तर पर सत्यापन में देरी हुई, फिर विभागाध्यक्षों के स्तर पर फाइलें लंबित रहीं. इसी वजह से सरकार को बार- बार समय सीमा बढ़ानी पड़ी.