चंडीगढ़ | हरियाणा में छोटी और मीडियम साइज की फैक्ट्रियों और संस्थान में काम करने वाले कर्मचारियों को भी अब ESI कार्ड का लाभ मिलेगा. इसके लिए संस्थान अपनी मर्जी से ESI कॉरपोरेशन में रजिस्टर कर सकते हैं. उनके ऊपर किसी तरह की कोई शर्त नहीं होगी.
समय रहते मिलेगा इलाज
क्रेशर जोन, टाइल, कोयला और सीमेंट बनाने और बेचने वाले वर्करों के लिए ESI कार्ड लेना ज़रूरी कर दिया गया है. इस कार्ड के आधार पर वर्कर ESI डिस्पेंसरी और अस्पतालों में इलाज करवा सकेंगे. बता दें कि क्रेशर जोन में कार्यरत लोगों को काम के कुछ महीने बाद ही सांस और फेफड़ों से संबंधित रोग हो जाते हैं. अब ESI कार्ड मिलने के बाद उनकी स्वास्थ्य पर नजर रखना आसान हो जाएगा और वे ESI अस्पतालों में समय रहते इलाज करवा सकेंगे.
31 मार्च 2025 तक के ESIC रिकॉर्ड के अनुसार, राज्य में ESI कार्ड होल्डर की संख्या का आंकड़ा करीब 30 लाख है. केंद्र सरकार ने अब चार नए लेबर कोड (वेज कोड, इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड, सोशल सिक्योरिटी कोड और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ और वर्किंग कंडीशंस कोड) लागू कर दिए हैं. इसके बाद ही, ESIC अधिकारियों ने कार्ड होल्डर की संख्या बढ़ाने की तैयारी की है.
वर्करों को दी जाएगी जानकारी
प्रदेश सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि ESI कार्ड जारी होने पर एम्प्लॉयर की सैलरी से 3.25% और वर्कर की सैलरी से 0.75% का योगदान ESIC अकाउंट में जमा होता है. इसी के आधार पर वर्कर और उसकी फैमिली को इलाज़ का लाभ मिलता है. यदि किसी फैक्ट्री या संस्थान में 10 से भी कम वर्कर हैं, तो भी वह ESI कार्ड बनवा सकता है. फैक्ट्रियों में वर्करों की संख्या की बाध्यता खत्म कर दी गई है. ESIC, हरियाणा के रीजनल डायरेक्टर सुगन लाल मीणा ने बताया कि अलग- अलग एरिया में सर्वे किए जाएंगे और कार्ड बनाने से जुड़ी जरूरी जानकारी दी जायेगी.
