महेंद्रगढ़ | कहते हैं सीखने की कोई उम्र नहीं होती. हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले की 63 वर्षीय सुशीला देवी ने इस कहावत को सच साबित कर दिया. राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) की 10वीं परीक्षा में 79.6 प्रतिशत अंक हासिल कर उन्होंने उन लोगों के लिए मिसाल पेश की है, जो उम्र को सीखने की राह में बाधा मानते हैं. सुशीला देवी की पढ़ाई बचपन में ही पांचवीं कक्षा के बाद रुक गई थी.

परिवार की सामाजिक सोच और गांव से बाहर पढ़ने की अनुमति न मिलने के कारण उनका सपना अधूरा रह गया. करीब 45 साल पहले शादी के बाद उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं, लेकिन पढ़ने की आदत कभी नहीं छोड़ी. वह नियमित अखबार पढ़ती रहीं और शिक्षा के प्रति उनका लगाव बरकरार रहा.
63 वर्षीय सुशीला देवी
एक दिन बेटे विष्णु ने उन्हें अखबार पढ़ते देखा और आगे पढ़ने की इच्छा पूछी. बेटे ने उनकी बात को गंभीरता से लिया और NIOS से 10वीं का फॉर्म भरवा दिया. इसके बाद, पूरे परिवार ने उनका साथ दिया. बेटे- बेटियों ने कठिन विषयों की तैयारी कराई जबकि पति ने भी हर कदम पर सहयोग किया. अप्रैल 2026 में हुई परीक्षा में सुशीला देवी ने प्रथम श्रेणी से सफलता हासिल की. उन्होंने अंग्रेजी में 89, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में 88, गणित में 78, पेंटिंग में 76 और हिंदी में 67 अंक प्राप्त किए. पांचवीं तक पढ़ी होने के बावजूद उन्होंने रोज तीन से चार घंटे पढ़ाई कर गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों पर विशेष मेहनत की.
आगे का सपना
अब सुशीला देवी का लक्ष्य 12वीं की परीक्षा पास करना है. अगर मन में लगन हो तो किसी भी उम्र में पढ़ाई शुरू की जा सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि गांव के लोग चाहेंगे तो भविष्य में सरपंच का चुनाव लड़ने पर भी विचार करेंगी.