ज्योतिष | हिंदू धर्म में सकट चौथ व्रत को विशेष महत्व प्राप्त है. अबकी बार यह व्रत 6 जनवरी यानी कि मंगलवार के दिन रखा जाएगा. महिलाएं इस पावन व्रत को हर साल माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को संतान की लंबी आयु और सुख- सौभाग्य की कामना के लिए रखती है. सनातन धर्म में इस व्रत की विशेष महत्वता है. साथ ही, इससे जुड़े हुए कुछ नियमों के बारे में भी जानकारी दी गई है. अगर आप पहली बार यह व्रत रखने जा रही है तो आपको इन नियमों के बारे में अवश्य ही जानकारी होनी चाहिए.
सकट चौथ का व्रत
इसके लिए सबसे पहले आपको सूर्य उदय से पहले उठकर स्नान कर लेना है. आपको गणपति जी को ईशान कोण में विराजमान कर लेना है और विधि विधान तरीके से उनकी पूजा अर्चना करनी है. इस दौरान पीले रंग के वस्त्र पहने जाते हैं. गणपति की पूजा करते समय साधक का मुंह पूर्व या फिर उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए.
इस व्रत की पूजा करते समय गणपति को उनकी प्रिय चीज जैसे कि दूर्वा, तिल का लड्डू, मोतीचूर का लड्डू आदि अर्पित करना चाहिए. इस व्रत के दौरान आपको कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए जैसे की व्यक्ति को ज्यादा क्रोध नहीं करना चाहिए, ना ही इस दिन झूठ बोलना और किसी की आलोचना करने से बचना चाहिए.
इन बातों का रखें ध्यान
- सकट चौथ के व्रत के दिन साधक को भूलकर भी तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए.
- इस व्रत के दिन आपको दिन में भूलकर भी सोना नहीं चाहिए.
- अपने तन मन को पवित्र रखना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.
- इस व्रत की पूजा में भूल कर भी गणपति को तुलसी दल समर्पित नहीं करना चाहिए.
व्रत का महत्व
इस व्रत को विधि विधान तरीके से रखने से साधकों को मनचाहा फल प्राप्त होता है. हिंदू धर्म की मान्यता, के अनुसार सकट चौथ व्रत वाले दिन भगवान गणेश जी को भूलकर भी टूटे हुए अक्षत, बासी फुल, केतकी का फूल, तुलसी दल अर्पित नहीं करना चाहिए. आपको पूजा को काफी ध्यान से और नियमों के साथ करना चाहिए. ऐसा करने से साधको का जीवन खुशियों से भरा रहता है और संतान की लंबी आयु होती है और जीवन में सुख- समृद्धि बनी रहती है.
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. Haryana E Khabar इनकी पुष्टि नहीं करता है.
