नई दिल्ली | यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) को लेकर देशभर में मचे बवाल के बीच आज इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस मामले पर सुनवाई के बाद देश की सबसे बड़ी अदालत ने UGC के नए नियमों पर रोक लगा दी है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने कहा कि इसके प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है.
कोर्ट ने यह टिप्पणी उन याचिकाओं पर की है, जिनमें आरोप लगाया गया है कि नए नियम जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स के साथ भेदभाव करते हैं. UGC ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था. इनका देशभर में विरोध हो रहा है.
UGC के नए नियमों पर SC ने लगाई रोक
अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. साथ ही नियमों का ड्राफ्ट फिर से तैयार करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी.
क्या था पूरा विवाद?
विभिन्न याचिकाकर्ताओं ने UGC के नए नियम को मनमाना, भेदभावपूर्ण और संविधान के साथ-साथ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी थी. UGC के नए नियम के विरोध करने वालों का कहना है कि इस एक्ट में भेदभाव की जो परिभाषा दी गई है उससे ऐसा लगता जैसे जातिगत भेदभाव सिर्फ SC, ST और OBC के साथ ही होता है.
जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स को ना तो कोई संस्थागत संरक्षण दिया गया है और ना ही उनके लिए कोई grievance redressal system की व्यवस्था है. याचिकाकर्ता ने कहा है कि वैसे तो इस एक्ट को समानता बढ़ाने के लिए लाया गया है, लेकिन ये खुद भेदभाव बढ़ाता है.
इसमें General Caste यानि स्वर्णों को ‘नेचुरल ऑफेंडर’ माना गया है. इसलिए इसकी समीक्षा होनी चाहिए और जब तक सुप्रीम कोर्ट इस पर फैसला नहीं करता, तब तक नए एक्ट के लागू होने पर रोक लगनी चाहिए.
CJI ने दोहराई समानता की बात
CJI सूर्यकांत ने कहा कि एसजी, कृपया इस मामले की जांच के लिए कुछ प्रतिष्ठित व्यक्तियों की एक समिति गठित करने के बारे में सोचें ताकि समाज बिना किसी भेदभाव के एक साथ विकास कर सके. हमें आज़ादी मिले 75 साल गुज़र चुके हैं और हम जातिगत भेदभाव से अभी भी जूझ रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि अंतर्जातीय विवाह हो रहे हैं और विश्विद्यालयों में छात्र पढ़ते हैं और साथ रहते हैं.
