हिसार | हरियाणा के हिसार जिले के रावत खेड़ा गांव में लगभग 550 साल पुराने गुरु जम्भेश्वर जी से जुड़े ऐतिहासिक साथरी मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य का शुभारंभ हो गया है. इस प्राचीन स्थल को अब भव्य रूप दिया जाएगा. इस मंदिर के लिए 84 गांवों के लोगों ने मिलकर करीब 7 करोड़ रुपए का सहयोग किया है. फिलहाल निर्माण के लिए फाउंडेशन का काम शुरू कर दिया है.
एकमात्र साथरी मंदिर
सरपंच प्रतिनिधि श्रीराम सिगड़ ने बताया कि रावत खेड़ा का जम्भेश्वर साथरी मंदिर हरियाणा और पंजाब के बिश्नोई समाज का एकमात्र साथरी मंदिर माना जाता है. यह स्थान गुरु जम्भेश्वर जी के आगमन से जुड़ा हुआ है और समाज के लोगों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है.
उन्होंने बताया कि मंदिर में पहले भियासर के महंतो की गद्दी परंपरा चलती थी, लेकिन अंतिम महंत जगदीश राम का करीब 51 साल पहले निधन हो गया था, इसके बाद से यहां महंत गद्दी की परंपरा बंद हो गई.
गांव बसने से पहले आस्था का प्रतीक
गांव के बुजुर्गों के अनुसार यह स्थान गांव बसने से पहले भी आस्था का केंद्र रहा है. यहां की मान्यता है कि जब गुरु जम्भेश्वर जी देश भ्रमण करते हुए अपने साधु-संतों और भक्तों की जमात के साथ यहां पहुंचे थे, तब गांव की बसावट ऊंचे टीले पर थी. वर्तमान मंदिर भी उसी ऊंचे टीले पर स्थित है.
बताया जाता है कि गांव से पूर्व दिशा में दो छलांग दूरी पर स्थित पिपलिया नामक जोहड़ में पानी की उपलब्धता के कारण गुरु जी ने यहां विश्राम किया था. बाद में बिश्नोई समाज के अनुयायी वहां पहुंचे और गुरु महाराज की पहचान कर उन्हें स्वीकार किया. तभी से यह स्थान समाज के लिए आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.
