चंडीगढ़ | अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे ईरान- इजराइल युद्ध का असर अब भारत के स्थानीय बाजारों में भी देखने को मिल रहा है. हरियाणा के फुटवियर उद्योग पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा है जिसके चलते जूते- चप्पलों की कीमतों में 10 से 20% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. उद्योग से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई में आई बाधाओं के कारण उत्पादन लागत में भारी इजाफा हुआ है.
फुटवियर की कीमत में बढ़ोतरी
जूते- चप्पलों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई जरूरी कच्चे माल जैसे पॉलीमर, EVA, रबर और विभिन्न केमिकल्स की कीमतों में हाल के दिनों तेजी आई है. जानकारी के अनुसार, पॉलीमर के दाम लगभग 50 से 60% तक बढ़ गए है जबकि EVA के दाम करीब 35 से 40% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसके अलावा पैकेजिंग सामग्री, ट्रांसपोर्ट और अन्य औद्योगिक लागत भी बढ़ने से फुटवियर पर अधिक आर्थिक दबाव पड़ा है.
बहादुरगढ़ देश का प्रमुख फुटवियर हब
हरियाणा के बहादुरगढ़ को देश का प्रमुख फुटवियर हब माना जाता है. यहां करीब 1500 से ज्यादा जूता निर्माण और उससे जुड़ी इकाईयां काम कर रही है और यहां से लगभग 700 करोड़ का एक्सपोर्ट होता है. यहां से करीब 30 हजार करोड़ का उत्पादन किया जा रहा है. यहां से तैयार उत्पाद देश के कई राज्यों के साथ- साथ विदेशों में भी भेजे जाते है. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हुई है जिससे लागत बढ़ने बाद कंपनियों को मजबूरी में उत्पादों के दाम बढ़ाने पड़े है.
फुटवियर कारोबारियों के अनुसार पहले जहां एक जोड़ी जूते या चप्पल की कीमत कम थी. अब उसी उत्पाद में 10 से 20% तक की बढ़ोतरी हुई है. खासकर स्पोर्ट्स शूज, स्कूल शूज और सामान्य उपयोग वाले फुटवियर की कीमतों में ज्यादा असर देखा जा रहा है.
व्यापारियों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति जल्द सामान्य नहीं तो आने वाले महीनों में कीमतों में और बढ़ोतरी होगी. इसके अलावा, गैस एजेंसियों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है. अगर ऐसे ही चलता रहा तो देशभर में महंगाई बढ़ सकती है.
