चंडीगढ़ | पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की तरफ से हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (HSSC) को लेकर कुछ सवाल उठाए गए हैं. हाई कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता और समान अवसर के सिद्धांत को लेकर हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन की कार्यप्रणाली पर सवाल खडे किए हैं. जैसा कि आप सब जानते हैं हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन द्वारा ग्रुप सी व डी की सरकारी भर्तियां की जाती है.
हरियाणा में प्राथमिकता के आधार पर मिले विभाग
अदालत ने देखा कि आयोग द्वारा चयनित उम्मीदवारों को विभाग आवंटित करने में एक अपारदर्शी और मनमाना तरीका अपनाया गया, जिससे संविधान में प्रदत्त समानता और निष्पक्षता के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है.
जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की तरफ से अपने विस्तृत आदेश में क्लियर किया गया कि आयोग ने उम्मीदवारों की मेरिट रैंकिंग की अपेक्षा उनके द्वारा भरी गई प्राथमिकताओं की संख्या को आधार बनाकर उन्हें विभागों का आवंटन किया. कोर्ट का कहना है कि रैंकिंग की अनदेखी कर ‘छिपे नियम से विभाग आवंटन किया गया है.
हाई कोर्ट ने मामले को माना गंभीर
हाई कोर्ट की तरफ से इस मामले को गंभीर माना गया व हरियाणा के मुख्य सचिव को निर्देशित किया हैं कि वे पूरे मामले की जांच करने पर विचार करें. कोर्ट की तरफ से यह भी सामने लाया गया कि आयोग ने अक्टूबर 2019 में एक आंतरिक प्रस्ताव पारित कर उन उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने का फैसला किया था. कोर्ट द्वारा हरियाणा के मुख्य सचिव को पूरे मामले की जांच करने पर विचार करने के लिए निर्देशित किया गया है.
