हरियाणा में नगर निगम चुनावों पर फिर छाए संकट के बादल, जानें अब कहां फंसा पेंच

चंडीगढ़ | हरियाणा में नगर निगम चुनावों पर फिर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. पूर्व पार्षद ऊषा रानी सहित कई अन्य याचिकाकर्ताओं ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर हरियाणा सरकार की उस प्रकिया को चुनौती दी है जिसमें जनगणना आंकड़ों की बजाय फैमिली इंफॉर्मेशन डेटा रिपॉजिटरी (FIDR) के आधार पर सीटों का निर्धारण और आरक्षण किया गया है.

sarpanch election chunav

हाईकोर्ट में दायर याचिका में स्पष्ट किया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 243- P के अनुसार ‘जनसंख्या’ का अर्थ अंतिम प्रकाशित जनगणना के आंकड़ों से है, लेकिन राज्य सरकार ने 2023 और 2024 के संशोधनों के जरिए हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 में बदलाव कर FIDR डेटा को आधार बना लिया.

नियमों का सीधा उल्लंघन

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि यह कदम न केवल संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को भी प्रभावित करता है. हाईकोर्ट में दायर इस याचिका में पंचकूला नगर निगम के वार्ड परिसीमन को भी कठघरे में खड़ा कर दिया गया है. आरोप है कि परिसीमन प्रकिया के दौरान प्राप्त आपत्तियों पर विचार किए बिना ही अंतिम अधिसूचना जारी कर दी गई, जो 1994 के नियमों का सीधा उल्लंघन है.

वार्डों के निर्धारण में भौगोलिक एकरूपता, संतुलन और जनसंख्या अनुपात जैसे मूल सिद्धांतों की भी अनदेखी की गई है. याचिकाकर्ताओं ने 10 अप्रैल 2026 की उस अधिसूचना को भी चुनौती दी है, जिसमें केवल अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीटों की घोषणा की गई थी जबकि अन्य वर्गों जनरल, पिछड़ा वर्ग (BC- A, BC- B) के लिए आरक्षण एक साथ घोषित नहीं किया गया.

यह भी पढ़े -  हरियाणा पुलिस भर्ती पीएमटी में आधार से होगा उम्मीदवारों का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, आधार को कर लें अनलॉक

चुनावों पर रोक लगाने की मांग

इसे मनमाना, भेदभावपूर्ण और चुनावी प्रक्रिया के मूल ढांचे के विपरीत बताया गया है. याचिका के अनुसार, राज्य सरकार ने पहले 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का निर्धारण किया था, लेकिन अब बिना किसी नई जनगणना के FIDR डेटा लागू कर दिया गया, जिससे आरक्षित सीटों की संख्या और स्वरूप में बदलाव आया है. इससे चुनावी प्रक्रिया की वैधता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं.

मेयर पद और वार्डों के आरक्षण के लिए चिट्ठी प्रक्रिया (ड्रॉ ऑफ लॉट्स) भी केवल कुछ नगर निगमों में लागू की गई जबकि नियमानुसार इसे पूरे प्रदेश में एक साथ किया जाना चाहिए था.

याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से मांग की है कि पंचकूला नगर निगम की सभी सीटों का निर्धारण 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाए और जब तक मामले का अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए.

Avatar of Ajay Sehrawat
Ajay Sehrawat
View all posts

मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ.